dharma sangrah

क्यों भगवान शिव को प्रिय है बेलपत्र, क्या माता पार्वती के पसीने से हुई थी उत्पत्ति

WD Feature Desk
गुरुवार, 9 जनवरी 2025 (16:32 IST)
How did belpatra originate: हिंदू धर्म में बेलपत्र का विशेष महत्व है। इसे भगवान शिव को अर्पित किया जाता है। पूजा पाठ में भी बेलपत्र का विशेष महत्व है लेकिन क्या आप जानते हैं कि बेलपत्र की उत्पत्ति कैसे हुई? आइए जानते हैं इस पौराणिक कथा के बारे में। इस आलेख में हम आपको बता रहे हैं कैसे हुआ बेलपत्र का जन्म और क्यों भगवान शिव को यह इतना प्रिय है।

माता पार्वती के पसीने से हुआ बेलपत्र का जन्म
एक बार माता पार्वती कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और देवी-देवताओं के लिए भोजन बना रही थीं। भोजन बनाते समय माता पार्वती को बहुत पसीना आ रहा था। उस पसीने को माता पार्वती ने अपनी उंगलियों से पोछकर उसकी बूंदों को छटक दिया। माता पार्वती के पसीने की ये बूंदें मंदर पर्वत पर जाकर गिरीं और इन बूंदों से ही बेलपत्र के पेड़ की उत्पत्ति हुई।

क्यों भगवान शिव को प्रिय है बेलपत्र?
बेलपत्र भगवान शिव को बेहद प्रिय है। इसके पीछे कई कारण हैं:
 ALSO READ: नर्मदा तट पर स्थित 2500 साल पुराना ये कुबेर मंदिर साक्षात भगवान शिव के चमत्कार का है प्रतीक
बेलपत्र का धार्मिक महत्व
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : सेहत, ब्यूटी केयर, आयुर्वेद, योग, धर्म, ज्योतिष, वास्तु, इतिहास, पुराण  आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार जनरुचि को ध्यान में रखते हुए सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इससे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं है करता । किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 25 अगस्‍त 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

बुध का पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में गोचर: 4 राशियों के लिए खुलेंगे प्रगति के द्वार

रक्षाबंधन 2026: भाई को राखी बांधते समय ध्यान रखें ये 7 ज़रूरी नियम

श्रावण मास का अंतिम मंगला गौरी व्रत: क्या करें और क्या न करें

गायत्री जयंती 2026: महत्व, शुभ मुहूर्त एवं परंपराएं और श्रावणी उपाकर्म

अगला लेख