suvichar
✕

Motivational Story : बाघ से इस तरह बच गई गाय

अनिरुद्ध जोशी
कृष्ण काल में नंदा नाम की एक गाय थी। चारा चरते हुए झुंड से बिछड़ गई और वहां पहुंच गई जहां एक बाघ बैठा था। बाघ गरजते हुए नंदा पर टूट पड़ा। नंदा की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। उसे अपना नन्हा बछड़ा याद आने लगा। उसके आंसुओं की धारा बह निकली।
 
 
बाघ बोला- मालूम होने के बावजूद तुम मेरे इलाके में आ गई। ऐसा लगता है कि तुम्हें अब जीवन से प्यार नहीं रहा।
 
 
नंदा ने गिड़गिड़ाते हुए कहा- मेरा अपराध क्षमा करो, मुझे अपने जीवन का शोक नहीं। मैं अपने बच्चे के लिए शोक कर रही हूं। वह अभी बहुत छोटा है। मेरे न रहने पर उसकी क्या दशा होगी। मैं उसे दूध पिलाना चाहती हूं। यदि तुम मुझे थोड़ी देर के लिए छोड़ दो तो मैं उसे प्यार कर और उसके हित का उपदेश देकर लौट आऊंगी। फिर तुम मुझे खा जाना।
 
 
बहुत शपथें खाने के बाद। नंदा को बाघ ने छोड़ दिया। नंदा दौड़ती हुई अपने बछड़े के पास गई और उसे जी भरके दूध पिलाया तथा सभी गायों और बछड़े को बाघ को दी शपथ भी बताई। सभी ने उसे वापस जाने के लिए मना किया, लेकिन वह नहीं मानी। सत्य की रक्षा के लिए वह बाघ के पास चली गई। उसका बछड़ा और सभी गायें रोती रही।
 
नंदा ने कहा- मैं सत्यधर्म का पालन करती हूं, इसीलिए तुम्हारे पास आ गई हूं। अब तुम मेरे मांस से अपनी इच्छा की पूर्ति करो।
 
 
नंदा की सत्यनिष्ठा को देखकर बाघ आश्चर्यचकित हो गया। उसने कहा कि सत्य की परीक्षा के लिए ही मैंने तुम्हें छोड़ा था। तुम्हारी धर्मनिष्ठा ने मेरे जीवन को बदल दिया है। आज से तुम मेरी बहन हुई।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख