हाइकु 66 केसरी धूप क्षितिज में सर्वत्र सजा वसंत। कस्तूरी गंध ऋतुराज महका साजन संग नव कोंपलें प्यारे से मनमीत अंग उमंग। पीत चूनर ऋतुराज झूमर नाचे मयूर। प्रेम के गीत मदमाती-सी प्रीत वसंत रीत। फूली सरसों वसुधा पुलकित झूमा वसंत। रसविलास...