Hanuman Chalisa

प्रेम कविता : गीत बनकर वो आने लगे

राकेशधर द्विवेदी
गीत बनकर वो आने लगे
गीत बनकर वे आने लगे
अधरों पर मुस्कुराने लगे
राज अंखियन का क्या कहूं मैं
उनके नैना कजरारे लगने लगे
गीत बनकर वे आने लगे
गीत बनकर वे आने लगे।
गजल बन कर गुनगुनाने लगे
राज दिल का कहूं मैं क्या 
हिचकी बनकर वो सताने लगे
अधरों पर वे मुस्कुराने लगे
गीत बनकर वे आने लगे।
आइनों ने जब देखा उन्हें
वो खुद ही शरमाने लगे
डूब जाने लगा हूं खुद ही मैं
मुझको वो मैखाने लगने लगे
और हम डूब जाने लगे।
अधरों पर वे मुस्कुराने लगे
गीत बनकर वे आने लगे।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

इलाज आपकी थाली में, ध्यान नहीं दिया तो साइलेंट किलर साबित हो सकता है एनीमिया

घर संभालने वाली महिलाओं को 30 हजार; पर 'हाउस हसबैंड्स' का क्या?

भरपूर लाभ के लिए रोज करें मंडूकासन; जानिए इसे करने का सही तरीका

हिंदी साहित्य में पहेली के रूप में लिखी जाने वाली एक लयात्मक कविता: कह मुकरियां

सभी देखें

नवीनतम

Sant Kabir: अनपढ़ थे कबीर, फिर कैसे डिगा दी बड़े-बड़े पंडितों की गद्दी? सिकंदर लोदी भी टेक चुका था घुटने!

Diabetes Control Tips: बिना दवा के भी कंट्रोल हो सकती है शुगर! आजमाएं ये 10 जादुई और बेहद आसान घरेलू उपाय

World Drug Free Day 2026: विश्व नशा मुक्ति दिवस क्यों मनाना है जरूरी, जानें खास तथ्य

त्रेता से लेकर कलयुग तक कहानी चरण पादुका की

नशे की लत से उबरने के लिए कौनसी थेरेपी और कदम होते हैं सबसे असरदार

अगला लेख