sawan somwar

हिन्दी कविता : हाशिए पर नदी

राकेशधर द्विवेदी
हमेशा मानव सभ्यताओं का विकास 
नदियों के तट पर हुआ 
शायद नदी यह समझती थी
कि उसके बलिदान के द्वारा
असभ्य मानव सभ्य हो सकता है
धीरे- धीरे असभ्य मानव
अविकसित से अर्द्धविकसित व 
पुनः विकसित होता चला गया
विकास के इस क्रम में नदी 
ने समर्पित कर दिया अपना
यौवन, अपना सर्वस्व
कभी बिजली उत्पादन के वास्ते
कभी सिंचाई के वास्ते
आज जब विकसित मानव
मंगल पर जीवन की तलाश में है
और नदी हाशिए पर आ गई है
तब उसके तमाम विकसित पुत्र 
लिख रहे हैं उसके 
देवत्व की गाथाएं 
अनेक काव्य ग्रंथों में, 
शोध प्रबन्धों में चलचित्रों में 
और हाथ जोड़कर 
जीर्ण-शीर्ण हो चुकी नदी को समझा रहे हैं
मां आप तो भागीरथी हो
पतित पावनी हो विकास का हलाहल तो 
आपको ही पीना पड़ेगा।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

कांवड़ यात्रा : ‘बोल बम’ का सनातन संदेश

भारत की विभिन्नताओं में समाहित है अटूट अभिन्नता!

स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

दादाजी की याद में पोती की पाती, पढ़कर आंखें भी नम होगी, उर्जा भी मिलेगी

क्यों मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस? जानिए इतिहास और इसका महत्व

अगला लेख