sundarkand
✕

poem on Kargil: मनकही

गरिमा मिश्र तोष
एक लौ उम्मीद की रौशन कर लो
एक डोर साथ की तुम थाम लो

कुछ मुट्ठी भर जवानों का 
मुश्किल है यलगार जान लो
 
सब जुङ जाओ एक हो जाओ
दुश्मन से है मिली ललकार जान लो

एक लौ उम्मीद की रौशन कर लो
एक डोर साथ की तुम थाम लो
 
एक साथ खङे हो शमशीर बनो  
सब छोङ चले घर बार मान लो
 
एक लौ उम्मीद की रौशन कर लो
एक डोर साथ की तुम थाम लो

अब वतन को देना हके यार
लहु चुकाएगा कर्जेयार ठान लो
 
एक लौ उम्मीद की रौशन कर लो
एक डोर साथ की तुम थाम लो
    
कुछ जख्म मिले भर जाएंगे
वतन पर जाँ निसार जान लो 
 
एक लौ उम्मीद की रौशन कर लो
एक डोर साथ की तुम थाम लो
 
फिर जन्में मादरे वतन की खातिर
ले कर जज्बात के तूफान ठान लो
       
एक लौ उम्मीद की रौशन कर लो
एक डोर साथ की तुम थाम लो

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

कब मनाया जाएगा आचार्य विद्यासागर का जन्‍मोत्‍सव, जानिए उनके जीवन से जुड़ी खास बातें...

कौन थे महर्षि वाल्मीकि? कब मनाई जाएगी उनकी जयंती? जानिए उनके बारे में रोचक बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शक्ति और सामर्थ्य से सार्थक हो रहा है भारत

चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

रूस दे रहा है नाटो को परमाणु हथियारों की धमकी, NATO कमांड केन्द्रों पर हो सकते हैं हमले

अगला लेख