काल की अनंतता का प्रवर्तन, शून्य के वृत्त का सनातन आवर्तन। वर्तमान की चेतना से काल का आरंभ, प्रसूत अद्यतन क्षण का प्रारंभ। प्रवाहित है अतीत की ओर, साथ ही बहता है भविष्य का शोर। दोनों ओर समगतित्व, नैरंतर्य पुनरागमित अमरत्व। नटराज की काल-डमरू मध्य, ब्रम्ह्नाद...