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बालिका दिवस: मेरी बेटी, आंगन में हल्दी-कुंकू की रंगोली

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- किरण विश्वनाथ जोशी
 
सच्ची लगन, 
कर्मनिष्ठा और निरंतर प्रयास से 
उच्च शिखर पर बढ़ती रहो, 
अपनी लक्ष्मण-रेखा 
स्वयं खींच कर 
मान-सम्मान की गरिमामयी 
घृत दीपज्योति, 
पवित्र आगंन की श्याम तुलसी, 
चौरे की राम तुलसी जैसी मर्यादित, 
सागर सी गंभीरता, 
आकाश की विशालता, 
नभ में अरुंधति-सी चमकती रहो, 
 
मेरे आंगन में हल्दी-कुंकू की रंगोली 
सदा तुम दमकती रहो, 
 
मेरे पावन संस्कारों में पली 
चेहरे पर मर्यादा-मोहिनी सजाए 
सदा तुम चहकती रहो, 
 
मां गौरी का केशर-चंदन, 
भस्मी बाबा भोलेनाथ की 
हमेशा सुख के आशीषों से सराबोर रहो, 
 
रिमझिम सावन की मधुर फुहारों से 
निशदिन भीगती रहो, 
 
माता-पिता के आत्मसम्मान की रजनीगंधा 
मेरे मन की क्यारी में रोज-रोज महकती रहो... 
मेरी बेटी, सदा तुम खुश रहो...!

 

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