Publish Date: Mon, 22 Dec 2025 (14:07 IST)
Updated Date: Mon, 22 Dec 2025 (17:12 IST)
अरावली की पहाड़ियों पर कविता
अरावली की पहाड़ियों पर, एक कहानी बसी है,
धरती से लेकर आकाश तक, हवा में गूंजती है।
चुपके से लहराती हवाएं, जैसे कोई राज़ कह रही हों,
हर पत्थर, हर शिला, एक इतिहास समेटे हुए है,
प्राचीन हवाओं में, सैकड़ों खामोश बातें छुपी हुई हैं।
कभी रेत के झोंकों में, समंदर की आवाज़ सुनाई देती थी,
कभी गगन के पास, बादलों के साथ कहानी गूंजती थीं।
अरावली की वो पहाड़ियां, जिनकी चोटियां बादल से मिलती हैं,
सिर झुका कर सूरज को प्रणाम करती हैं।
इनकी राहों पर कभी महलों की छांव रही,
और कभी युद्धों की गूंजें, अपने आप में गहरी रही।
जब चांद की चांदनी रात में, इन पहाड़ियों से गुजरते हैं,
तो लगता है जैसे कोई नूरानी हसरतें बुनते हैं।
वो पुराने किलों के खंडहर, अब भी अपनी कहानी कहते हैं,
वो पत्थर, जो दिन में सूरज को देखकर चमकते हैं।
इन पहाड़ियों के भीतर कुछ तो रहस्य छुपा है,
जो हर एक को अपनी ओर खींचता है।
कभी दिन में सूरज से तपते हैं, कभी रात में शीतल चांदनी में,
अरावली की पहाड़ियों की वो शांत और लहराती लकीरें,
हमसे बहुत कुछ कहती हैं, हमें सब कुछ सिखाती हैं।
ये पहाड़ियां सिर्फ मिट्टी और पत्थर नहीं,
ये समय की गवाह हैं, और इतिहास की साक्षी हैं।
अरावली की पहाड़ियों पर, एक अनकहा गीत गूंजता है,
जो सर्दियों में बर्फ़ की चादर ओढ़कर, गर्मियों में पसीने से सनी रहती है।
अरावली, तुम हमेशा अनमोल रहोगी,
तुम्हारे कदमों में सब कुछ रचता रहेगा।
इनकी ऊंचाई को छूने की चाह रखने वाले,
कभी नहीं थकेंगे, क्योंकि तुम कभी नहीं थकती हो।
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