गुलमोहर की छांव तले नींद के आगोश में था तभी जयऽऽऽ शनि महराज के उद्घोष से नींद टूटी देखा तो एक व्यक्ति तेल के अधभरे पात्र में लौह प्रतिमा रखे खड़ा है। तेल में कुछ सिक्के डूबे हुए थे उसका मंतव्य समझ उसे एक सिक्का देकर विदा करता हूं। पुनः...