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हिन्दी कविता : इंतजार

संजय वर्मा 'दृष्ट‍ि'
दुआएं करते हैं 
घर में किलकारी सुनाई दे
जन्म लेता है जब घर में कोई 
तुतलाहट बोली में हम 
हो जाते हैं बच्चों के संग बच्चे 
उन्हें अपने हाव भाव से 
हंसाने का प्रयत्न करते हैं 
 
हर धर्म की मां उसे 
खिलाती /प्यार करती 
और गोदियों में ले जाती कभी इस घर 
कभी उस घर 
इससे हो जाता घरों में सुखद वातावरण
 
एक घर में उदास बेठी मां से 
उदासी का कारण पूछा 
तो किसी ने बताया कि -
इनकी बिटिया को क्रूर लोगों ने 
गर्भ में ही मार दिया
जब से उदास है
सामने घर में खेल रही 
बिटिया में 
अपनी बिटिया का अक्स देखती मां
मन ही मन कहती 
मेरी बिटिया जीवित होती तो 
आ जाती मेरे घर में भी खुशियां 
और हो जाती मेरे चेहरे से 
उदासी काफूर 
 
खुशिया छीनने 
चेहरे पर उदासी लाने वालों को 
कब कड़ी सजा मिलेगी 
कई मांओं को इसका इंतजार है 
 
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