डॉ. शिवा श्रीवास्तव कितने वर्षों बाद मुझे तुमसे मिलने वहां आना, अच्छा लगा था। वहां लकड़ी की सिर्फ दो ही कुर्सियां और बीच में कांच लगा टेबिल जो हमारी तरह पूरा पारदर्शी था। दो -दो करके उस टेबिल पर चाय के प्यालों के कई निशान जो हर...