Hanuman Chalisa

कविता : दुनिया का तमाशा

Webdunia
- पंकज सिंह
 
दुनिया का तमाशा चलता रहता है,
मनोरंजन इसका कभी ना रुकता है।
 
लाख जतन बादल करता है,
मेला भरने से ना रुकता है। 
 
झूम उठती हर क्यारी है,
गाने लगती बस्ती न्यारी है।
 
छत पर जब थाली बजती है,
किलकारी घर में गूंजती है।
 
बचपन कहां गुम हो जाता है,
रवि सिर पर चढ़ आता है।
 
किरणों से जीवन तप जाता है,
देख बुढ़ापा प्राणी रोने लगता है।
 
पानी का बुलबुला फूट जाता है,
बहता हवा-सा थम जाता है।
 
खिलाड़ी समझ दांव लगाता है,
दर्शक बन रह जाता है।
 
जोड़-तोड़ खूब करता है,
गांठ की पूंजी गंवा देता है।
 
सूरज जाता है, चांद आता है,
चांद ना हो तो तारा होता है।
 
सितारा बन आसमां में उभरता है,
तकदीर का बादशाह बन जाता है।
 
वक्त बड़ा बेरहम होता है,
भोर का तारा भी छुप जाता है।
 
पीढ़ियां यहां कितनी दफन है,
दूसरे के कंधे पर पहले का तन है।
 
मैं भी आया मुझे भी जाना है,
ना रोक पाएगा जमाना है।
 
आने वाला जी भरकर रोता है,
जाने वाला चैन की नींद सोता है।
 
बहुत चल लिया अब सुस्ताना है,
चला-चली का खेल पुराना है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

भरपूर लाभ के लिए रोज करें मंडूकासन; जानिए इसे करने का सही तरीका

पिंडली के दर्द से छुटकारा पाने के 5 कारगर तरीके जानें

jharkhand recipe: झारखंड का पारंपरिक पकवान ओकोपोको, जानिए कैसे बनता है यह व्यंजन

जब रास्ते बंद दिखें… समझ लो किस्मत नया दरवाज़ा खोल रही है

ताड़ासन शरीर को फौलादी और सुडौल बनाने वाला योगासन, इसके हैं 5 फायदे

सभी देखें

नवीनतम

18 जून को क्यों याद की जाती हैं रानी लक्ष्मीबाई? जानें उनके बलिदान की पूरी कहानी

Hindi Poem on Yoga: योग पर हिन्दी कविता: आओ मिलकर योग करें

Guru Arjan Dev: कैसे मनाया जाता है गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस?

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: जानिए इस बार की थीम, उद्देश्य और खास कार्यक्रम

नज़्म: बरसात का मौसम

अगला लेख