झकझोरकर मुझे हवा ने अलौकिक खेल दिखाया उतार कमीज पल में उठा पटक कर ले उड़ी घुमा फिराकर टांग दी बबूल की टहनी पर I मुझे मार धक्का पटक गड्ड़े में बैठ छाती पर मानो तांडव नया अजीब दिखाया बोझ कल्पनाओं का लाद, गुम होकर डरावना...