Hanuman Chalisa

हिन्दी कविता : आजकल

तरसेम कौर
आजकल बचाने वाले कम हैं
मारने वाले ज्यादा हो गए हैं
हर कोई नजर गड़ाए बैठा है
 
कोई किसी के शरीर पर
कोई किसी के पैसे पर
किसी को है किसी की कुर्सी की चाह
तो किसी को है किसी की जिंदगी की चाह
घर की दीवारें 
और धरती की सीमाएं
बढ़ रही हैं दिन ब दिन
पत्थर मार के की जाती हैं बातें
 
प्यार मोहब्बत और ईमान को
बंद करके रख दिया है एक तिजोरी में
जिसकी चाबी फेंक दी गई है
हंसी और कहकहे भाप बनकर खो गए हैं
 
बन गए हैं बादल न बरसने वाले
ले रही तोहफा हमसे अगली पीढ़ी 
खोखली इंसानियत का 
पैबंद लगे फटे पुराने रीति रिवाजों का..!!
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

इलाज आपकी थाली में, ध्यान नहीं दिया तो साइलेंट किलर साबित हो सकता है एनीमिया

घर संभालने वाली महिलाओं को 30 हजार; पर 'हाउस हसबैंड्स' का क्या?

भरपूर लाभ के लिए रोज करें मंडूकासन; जानिए इसे करने का सही तरीका

हिंदी साहित्य में पहेली के रूप में लिखी जाने वाली एक लयात्मक कविता: कह मुकरियां

सभी देखें

नवीनतम

24 जून: मध्य प्रदेश में आज मनेगा रानी दुर्गावती गौरव दिवस, जानें उनके बलिदान की कहानी

Rani Durgavati: रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस: इतिहास की वीर नायिका को नमन

डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी पुण्यतिथि, जानें 5 अनसुने तथ्य

रानी दुर्गावती के बलिदान की कहानी की 3 खास बातें

Sanjay Gandhi: पुण्यतिथि विशेष: संजय गांधी कौन थे, जानें राजनीति में उनका योगदान

अगला लेख