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कविता : पर्व आजादी का

डॉ मधु त्रिवेदी
आ गया पर्व आजादी का,
एकजुट ध्वज बनाने लगे।
 
शान इसकी रहेगी सदा,
हाथ दुश्मन न जाने लगे।
 
भूल जाए न हम बात यह,
दाम कितने चुकाने लगे।
 
नेहरू, बोस, गांधी सभी,
पाठ नैतिक पढ़ाने लगे।
 
साल में एक दिन याद कर, 
मान उनको दिलाने लगे।
 
खा मिठाई मना ले खुशी,
खास अपने बुलाने लगे।
 
अनगिनत जान दी इसलिए 
कद्र उसकी कराने लगे।

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