suvichar
✕

दीप पर्व पर कविता : दिवाली के दीये जलने लगे...

राकेशधर द्विवेदी
दिवाली के दीये जलने लगे,
आंगन में रोली सजने लगी।
कमरे में बैठी छोटी-सी बिटिया,
चौखट में आकर चहकने लगी। 
 
धीरे से उसने अम्मा से बोला,
लाकर दे मुझको तुम नया चोला।
जिसको पहनकर बाहर मैं जाऊं,
मुहल्ले के बच्चों के संग दिवाली मनाऊं।
 
रोकर के उससे अम्मा ने बोला,
अब तुमने है मुझसे बोला।
 
दिवाली दिवाला निकालने लगी है,
गैस के सिलेंडर में जलने लगी है। 
बापू के पैसों को नजर लगी है, 
हर तरफ यह खबर लगी है।
 
ऐसे में दिवाली बनी है सौतन,
जिसे घर से दूर रखती है बेचारी।
तुमसे है हमारी यह विनती, 
कभी मत जलाना दिवाली की बत्ती।
 
दिवाली जो छीने मुंह का निवाला,
ऐसी दिवाली से कर लो किनारा।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

रूस दे रहा है नाटो को परमाणु हथियारों की धमकी, NATO कमांड केन्द्रों पर हो सकते हैं हमले

शारदीय नवरात्रि व्रत 2026: रोज-रोज साबूदाने की खिचड़ी खाने के 6 नुकसान

सबके लिए समय है... फिर अपने सपनों के लिए क्यों नहीं?

कब मनाया जाएगा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस? जानें कब हुई इसकी शुरुआत और क्‍या है उद्देश्‍य?

Maharaja Agrasen Jayanti: कौन थे महाराजा अग्रसेन? 5000 साल पहले दी थी ऐसी न्यायनीति, जानकर रह जाएंगे हैरान

अगला लेख