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लेखक बनना चाहते हैं तो 150 लोगों की परवाह मत कीजिए, आपको करोड़ों लोग पढ़ेंगे- नीलोत्पल मृणाल

सुरभि भटेवरा
शनिवार, 27 नवंबर 2021 (16:32 IST)
Indore literature festival seconds day 202: इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल के सीजन- 7 में 21वीं सदी के लेखक नीलोत्पल मृणाल दिव्या से दिव्या प्रकाश दुबे से वार्तालाप कर अपनी यूपीएससी से लेखक बनने की कहानी के किस्से शेयर किए।
 
 
- पिता से बच्चे का 3 तरह से संबंध होते हैं। 
- कोई भी हिंदुस्तानी पिता अपने बच्चे को लेखक नहीं बनाना चाहते हैं। 
- ओरिजिनल कंटेंट चोरी होना यह कलाकार की निजी समस्या है- नीलोत्पल मृणाल 
 
*आजकल ओरिजिनल Content चोरी हो रहा है, क्या कहेंगे? 
 
- रचनात्मकता बहुत बड़ा खतरा है। रचनात्मकता के लिहाज से ये मेरे लिए व्यक्तिगत जीवन की समस्याएं हैं। कलम आपसे कोई छीन नहीं सकता। बड़ी चुनौती यह होनी चाहिए कि आपका कंटेंट चोरी हो सकता है लेकिन मौलिकता इसे कहते हैं कि आप फिर से उसी पात्र को उठाएं और उसे ही अलग अंदाज में लिखें।
 
*19 साल की उम्र में जब कोई बिहार से मिट्टी लगाकर निकलता है उस लड़के की कहानी बताइए? 
 
*हिंदुस्तान में कोई भी पिता अपने बच्चे के लिए लेखक बनने का सपना नहीं देखते इस पर क्या कहेंगे?
 
- UPSC क्लियर नहीं हुआ तो बैचेनी बढ़ गई और वापस अपने गांव लौटना झोला लेकर वह संभव नहीं था। पिता जी ने कहा- गांव मत आना। हमको चेहरा मत दिखाना। कोई मतलब नहीं और हमसे पैसा मत लेना। बाप और बेटे के बीच 3 तरह का संबंध होते हैं... 
 
पहला- पिता आपको पैसा भी देते हैं, सलाह भी देते हैं।
दूसरा- जब आपको सिर्फ पैसे देते हैं, सलाह देना छोड़ देते हैं। 
तीसरा- जब तक आपको न पैसा देते हैं और न सलाह देते हैं। 
 
मेरा 2016 से तीसरा वाला दौर शुरू हो गया था। एक साल तक पहले कविता सुनाई, यूट्यूब पर काम शुरू किया। बैकअप के तौर पर काम रखा, कुछ अलग लिखकर मंच पर सुनाने लगे। सोचा अपने जहाज की कहानी लिखते हैं तो छात्रों को सहानुभूति मिलेगी।  
 
यह बैकअप लेकर एक किताब लिख दिया। किसी के हाथ में नहीं है। किताब कितनी बिकेगी लेकिन कंटेंट क्या लिखते हैं यह महत्वपूर्ण है। यह बात आपको बाहर वाला बताता है और वहीं से लेखन की यात्रा शुरू हुई। 
 
नौकरी छोड़कर लेखन के क्षेत्र में आएं यही मेरा सबसे सुंदर पल है। और यहां फेस्ट में मौजूद 400 लोग आपको सुनना आए हैं। मतलब आप सक्सेस हुए हैं। आप लेखक बनना चाहते हैं तो हिंदी के 150 लोगों की परवाह मत कीजिए आप को डेढ़ करोड़ लोग पढ़ेंगे।

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