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Bhai Dooj essay: बहन-भाई के प्रेम का पर्व भाई दूज, पढ़ें सुंदर, भावनात्मक हिन्दी निबंध

WD Feature Desk
बुधवार, 22 अक्टूबर 2025 (12:04 IST)
bhai dooj nibandh: भाई दूज का पर्व दीपावली के पांच दिवसीय महोत्सव का अंतिम और अत्यंत भावुक दिन होता है। इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार भाई और बहन के पवित्र और अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास को समर्पित है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करती हैं, जबकि भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनकी रक्षा का वचन देते हैं। यह पर्व न केवल पारिवारिक संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के रिश्ते के महत्व को भी दर्शाता है।ALSO READ: Dhanteras 2025: सुख-समृद्धि और आरोग्य का पावन पर्व धनतेरस, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध
 
भाई दूज का महत्व: भाई दूज एक ऐसा दिन होता है जब बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वे उन्हें तिलक करती हैं, मिठाई खिलाती हैं और मन से उनके लिए दुआ करती हैं। भाई भी इस प्रेम का आदर करते हुए अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उन्हें जीवन भर साथ निभाने का वचन देते हैं।
 
धार्मिक मान्यता: कहा जाता है कि यमराज अपनी बहन यमुनाजी से मिलने इस दिन उनके घर गए थे। यमुनाजी ने उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया और तिलक किया। यमराज इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने वचन दिया कि जो बहन इस दिन अपने भाई को तिलक करेगी, उसका भाई दीर्घायु और सुखी रहेगा। तभी से भाई दूज मनाने की परंपरा शुरू हुई।
 
भाई दूज का भावनात्मक पक्ष: भाई दूज केवल एक रस्म नहीं, बल्कि बहन की दुआओं और भाई की रक्षा का वादा है। यह पर्व हर बहन के उस स्नेह को दर्शाता है, जिसमें वह अपने भाई की चिंता करती है, उसके लिए प्रार्थना करती है। और हर भाई के उस संकल्प को दर्शाता है, जिसमें वह अपनी बहन की खुशी के लिए हमेशा खड़ा रहने का वादा करता है।ALSO READ: Bhai dooj 2025: वर्ष 2025 में कब है भाई दूज? तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त क्या है?
 
'भाई-बहन का रिश्ता वो किताब है,
जिसे हर दिन पढ़ो तो भी नया सा लगे।
भाई दूज उस रिश्ते का उत्सव है,
जहां हर पन्ने पर स्नेह ही स्नेह लिखे होते हैं।'
 
समापन: भाई दूज हमें रिश्तों की मिठास, प्रेम और एक-दूसरे के लिए समर्पण का पाठ सिखाता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की गहराई और पारिवारिक मूल्यों को उजागर करता है। हमें चाहिए कि इस पवित्र रिश्ते को केवल त्योहार तक सीमित न रखें, बल्कि हर दिन इसे निभाएं और सहेजें।
 
उपसंहार: भाई दूज केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई और बहन के बीच के शाश्वत और निस्वार्थ प्रेम का उत्सव है। यह उन अनगिनत भावनाओं को व्यक्त करने का दिन है जिन्हें शायद रोज़मर्रा की भाग-दौड़ में व्यक्त नहीं किया जा सकता। यह भारतीय संस्कृति की सुंदरता को दर्शाता है, जहां रिश्तों को त्योहारों के माध्यम से संजोया जाता है। यह पर्व हर भाई-बहन के जीवन में मिठास, सुरक्षा और अटूट प्रेम का संचार करता रहे, यही इस दिन की सबसे बड़ी प्रार्थना है।
 
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