ramcharitmanas

हिन्दी दिवस कविता : राष्ट्रभाषा की दु:खभरी गाथा

संजय जोशी 'सजग'
राष्ट्रभाषा की व्यथा। 
दु:खभरी इसकी गाथा।।
 
क्षेत्रीयता से ग्रस्त है। 
राजनीति से त्रस्त है।।
 
हिन्दी का होता अपमान। 
घटता है भारत का मान।।
 
हिन्दी दिवस पर्व है। 
इस पर हमें गर्व है।। 
 
सम्मानित हो राष्ट्रभाषा। 
सबकी यही अभिलाषा।।
 
सदा मने हिन्दी दिवस। 
शपथ लें मने पूरे बरस।। 
 
स्वार्थ को छोड़ना होगा। 
हिन्दी से नाता जोड़ना होगा।।
 
हिन्दी का करे कोई अपमान। 
कड़ी सजा का हो प्रावधान।। 
 
हम सबकी यह पुकार। 
सजग हो हिन्दी के लिए सरकार।।

ALSO READ: हिन्दी दिवस पर हिन्दी कविता : हिन्दी पर बात
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

जब उम्मीद थक जाए, तब साहस काम आता है

असली पनीर और Analog Paneer में क्या है फर्क? खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

अगला लेख