Hanuman Chalisa

Heat Stroke : लू कब, क्यों और किसे लगती है?

इन 5 तरह के लोगों को जल्दी लगती है लू, जरूर जान लीजिए

Webdunia
गर्मी के मौसम में लू लगने का खतरा होता है और इससे बचने के लिए हम कई तरीके भी अपनाते हैं। लेकिन सभी को लू नहीं लगती, यह भी सच है। तो फिर किन लोगों को लगती है लू ? जानिए यहां पर - 
 
ऐसे व्यक्ति को लू लगने का खतरा अधिक होता है जो मौसम के अनुसार खुद को ढाल नहीं पाता। गर्मियां आते ही तेज एसी में बैठता है। ऐसे व्यक्तियों का शरीर इतना कच्चा हो जाता है कि वे स्वाभाविक तापमान के साथ तालमेल नहीं बैठा पा‍ते। 
 
दूसरी तरफ जब एसी की ठंडक से तत्काल वह 42 या 44 डिग्री में आते हैं तो शरीर को घुटन होती है और लू को अवसर मिल जाता है अटैक करने का। 
 
लू उन लोगों को भी अधिक लगती है जिन्हें अक्सर त्वचा के रोग होते हैं और जो मधुमेह जैसे रोग से पीड़ित हैं। 
 
शराब पीने वाले भी लू की चपेट में जल्दी आते हैं। क्योंकि शराब लिवर के साथ-साथ ह्रदय को भी जलाती है। जब तापमान बढ़ता है तो शराबी अपनी कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के कारण मुकाबला नहीं कर पाता और बीमार हो जाता है। 
 
बेहद कमजोर, बुजुर्ग और मोटे लोगों को भी लू लगने का खतरा अधिक होता है। इसलिए गर्मी के मौसम में इन लोगों को खास ख्याल रखने की जरूरत है।
ALSO READ: कैरी पना : लू से बचाएगा, सेहत भी बनाएगा जानिए carry pana health benefits

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

घर पर BP चेक करते समय न करें ये गलतियां, जानें ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका

Health Benefits of Banana: कच्चे और पके केले में कौन कौनसे विटामिन होते हैं?

Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

घर की 'एनर्जी' बदल देंगी ये खास धूप, जानें किस धुएं में छिपा है क्या राज

Diabetes Control Tips: बिना दवा के भी कंट्रोल हो सकती है शुगर! आजमाएं ये 10 जादुई और बेहद आसान घरेलू उपाय

सभी देखें

नवीनतम

Avatar Meher Baba: अवतार मेहेर बाबा कौन थे, कब और क्यों मनाया जाता है मौन पर्व?

Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

राजनीति और धर्म का मूल जीवन का अध्यात्म हैं!

Monsoon Glow Secrets: उमस भरे मौसम में भी चेहरे पर रहेगा पार्लर जैसा निखार, नोट कर लें ये नेचुरल स्किन केयर टिप्स

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

अगला लेख