ramcharitmanas
✕

यह हैं बारिश की प्रमुख बीमारियां, जानिए कैसे करें बचाव

Webdunia
- डॉ. योगेश शाह, एमडी मेडिसिन

बारिश जहां गर्मियों के तपते मौसम से राहत दिलाती है वहीं शरीर के प्रति सावधानी रखने की भी मांग करती है। मौसम में बदलाव होने के साथ ही बीमारियां भी सामने आने लगती हैं। बैक्टीरिया को पनपने के लिए शुरुआती बारिश का मौसम सबसे अच्छा होता है। इस मौसम मेंजितनी सावधानी रखेंगे उतने ही बीमारियों से दूर रहेंगे।
 
बारिश के मौसम में जलजनित रोगों का प्रकोप होता है साथ ही जठराग्नि शिथिल हो जाने से बहुत ही जल्दी पेट खराब भी होता है। त्वचा के रोगों के साथ-साथ मलेरिया, डेंगू, वायरल फीवर, टायफाइड जैसी बीमारियां भी शरीर पर डेरा डाल लेती हैं। घर के आसपास पानी जमा हो जाने से मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की बस्तियाँ पनप जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में नंगे पैर घूमने से लेप्टोस्पायरोसिस नामक बीमारी हो जाती है। इस रोग का घातक प्रभाव लीवर और गुर्दे पर पड़ता है। 

ALSO READ: सावधान, बारिश में भूल कर भी न करें मछली का सेवन, जानें 4 कारण

जलजनित रोगों में सबसे अहम है पीलिया। बारिश के मौसम में प्रायः ड्रेनेज का पानी पेयजल की पाइप लाइन में पहुँच जाता है। इससे हेपेटाइटिस 'ए', 'बी', तथा 'ई' वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है। आमतौर पर लोग पीलिया को बहुत गंभीरता से नहीं लेते। पहले झाड़-फूँकसे ठीक कराने की कोशिश करते हैं। पीलिया के लक्षण मलेरिया, डेंगू से मिलते-जुलते हैं और यही वजह है कि मरीज का पहले मलेरिया या डेंगू का इलाज किया जाता है। दूषित पेयजल से होने वाली दूसरी बड़ी बीमारी है उल्टी और दस्त होना। पेट खराब होने के लिए स्ट्रीटफूड अधिक जिम्मेदार है खासकर बारिश में। सड़क के किनारे पर बिकने वाले पानी पताशे या कचौरी-समोसे कितने संक्रमित हो चुके हैं इसका अंदाजा लगाना ही कठिन है। जाहिर है कि संक्रमण के ये सबसे बड़े स्रोत हैं। खुले खाद्य पदार्थों पर मक्खियों का साम्राज्य होता है, जिससे टाइफाइड होने का जोखिम सबसे अधिक होता है। 
 
जहाँ तक हो सके बारिश के मौसम में पानी उबालकर पीना ज्यादा फायदेमंद होता है, लेकिन अधिक लंबे समय तक यह प्रयोग न करें। पानी को उबालने से कई खनिज पदार्थ निकल जाते हैं, जो शरीर के लिए बेहद जरूरी होते हैं। 
ALSO READ: रिमझिम मौसम का मजा, अस्थमा रोगी के लिए सजा, 12 काम के टिप्स

घर के आसपास जमा पानी जहाँ मच्छरों की बस्तियाँ बसने के लिए योग्य स्थान होता है वहीं घर में रखा कूलर भी मच्छरों को पनपने में मदद करता है। मच्छरों से बचने का एकमात्र उपाय है मच्छरदानी में सोना और घर के आसपास फालतू पानी जमा न होने देना। 
 
बारिश में अत्यधिक आर्द्रता होती है जिससे त्वचा में फंगस पैदा होने के अवसर काफी अधिक होते हैं। दोनों जांघों के बीच के जोड़ तथा बगलों में अथवा गरदन पर फंगस के कारण दाद, खाज, खुजली हो जाती है। गीले या नम कपड़ों में देर तक रहने से त्वचा अधिक संवेदनशील हो जाती है तथा वहाँ खुजली होने लगती है। अस्थमा के मरीजों पर हर साल बारिश बहुत भारी गुजरती है। वे भरसक अपना बचाव रखें ताकि दमे का दौरा न पड़े। इसके साथ ही जाम, सीताफल, अंगूर, केला, दही, कोल्ड्रिंक तथा आइसक्रीम का सेवन न करें। सर्दी-जुकाम होने पर जल्दी इलाज कराएं।

ALSO READ: पढ़ें 14 ऐसी बातें जो बरसात में आपको बचाएगी बीमारियों से...

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

ऐसे घनघोर ज्ञानी देश में जमुई से लेकर दिल्ली तक औरतों के रेप हो रहे हैं तो इसमें इतनी हैरानी क्‍यों?

विश्व शाकाहारी दिवस आज : क्यों मनाया जाता है यह खास दिन? जानें इसका इतिहास और महत्व

आज दुनियाभर में मनाया जा रहा है वृद्ध दिवस? जानिए इसका इतिहास और उद्देश्‍य

Blood Donation Day : देश में आज मनाया जा रहा है रक्तदान दिवस? क्‍या है इसका उद्देश्‍य? रक्‍तदाता को होते हैं ये फायदे

क्या बताऊं तुम्हें

अगला लेख