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गुजरात में बादलों का तांडव, हाईवे जाम, वाहनों की लंबी कतारें, कई जगह रास्ते ही बह गए

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Gujarat heavy rain
Gujarat heavy rain: गुजरात में मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से सुबह से ही सभी जगह बारिश का दौर शुरू हो गया है। सुबह 6 से 10 बजे के बीच 48 तालुकों में भारी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने आने वाले समय में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए राज्य के 6 जिलों में रेड अलर्ट, 8 जिलों में ऑरेंज अलर्ट और अन्य 6 जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया है। बाकी के क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना व्यक्त की गई है।

दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र में सबसे ज्यादा बारिश

राज्य में अब तक सीजन की औसत 13.27 प्रतिशत बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिसमें पिछले 24 घंटों के भीतर ही भारी असाधारण स्थिति देखने को मिली है। इस समयावधि के दौरान 14 तालुकों में 5 से 10 इंच जितनी भारी बारिश दर्ज हुई है। क्षेत्रवार बात करें तो दक्षिण गुजरात में सीजन की सबसे अधिक 17.11 प्रतिशत और सौराष्ट्र में 15.38 प्रतिशत बारिश हो चुकी है, जबकि जूनागढ़ के मांगरोल तालुका में तो महज तीन ही दिनों में सीजन की 103 प्रतिशत बारिश हो जाने से वहां मानसून का औसत कोटा पूरा हो गया है।

सूरत और दक्षिण गुजरात के रास्तों को भारी नुकसान

भारी बारिश के चलते सूरत जिले के ग्रामीण इलाकों में व्यापक नुकसान की खबरें मिल रही हैं। अरेख के बौधान गांव में वाव्या खाड़ी पर पुल निर्माण के लिए बनाया गया अस्थायी डायवर्जन पानी के तेज बहाव में बह गया है। इस मुख्य मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के कारण बारडोली, अरेख और मांडवी के बीच का सीधा संपर्क टूट गया है और स्थानीय लोगों को अब बारडोली जाने के लिए करीब 25 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

हाईवे बंद और समंदर उफान पर, वाहनों की लंबी कतारें

सौराष्ट्र में भी इंद्रदेव ने रौद्र रूप धारण कर लिया है, जिसके कारण द्वारका-सोमनाथ हाईवे भारी बारिश में बह जाने से यातायात के लिए बंद करना पड़ा है। मांगरोल के पास नोली नदी का पुल और हुसैनाबाद के पास सड़क धंसने से कई वाहन चालक बीच रास्ते में ही फंस गए हैं। दूसरी ओर, अमरेली के जाफराबाद में समंदर में 15 फीट ऊंची लहरें उछल रही हैं, जिसके कारण बंदरगाह पर 3 नंबर का सिग्नल लगा दिया गया है और मछुआरों को 7 जुलाई तक समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।

तापी नदी में बाढ़ और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत नजारा

भारी बारिश के बाद तापी नदी में पानी की भारी आवक होने से तापी का कॉज-वे ओवरफ्लो हो गया है और पानी का स्तर खतरे के निशान 6 मीटर को पार करके 6.82 मीटर तक पहुंच गया है। इस संकट के बीच जिले का प्राकृतिक सौंदर्य भी पूरी तरह खिल उठा है। सोनगढ़ के चीमेर गांव में स्थित प्रसिद्ध 'चीमेर झरना' पहाड़ियों के बीच अपने पूरे शबाब पर है। इससे सूरत, तापी और डांग सहित आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं।

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