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इंटरनेशनल चैस डे - भारत का चतुरंग बना शतरंज, भारत ने दिया था विश्व को यह दिमाग का खेल

Webdunia
- अथर्व पंवार
 
प्रतिवर्ष 2 जुलाई को इंटरनेशनल चैस डे मनाया जाता है। चैस अर्थात शतरंज एक दिमागी खेल के रूप में जाना जाता है। यह एक ऐसा खेल बन गया है जो किसी व्यक्ति के साथ-साथ आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के साथ भी खेला जा सकता है। पर क्या आप जानते हैं कि दुनियाभर में मशहूर शतरंज भारत की देन है। यह भारत का खेल है और यहीं जन्मा है। इसका प्राचीन नाम 'चतुरंग' था। इसको विदेशों में भिन्न-भिन्न नामों से पहचाना जाता है। जैसे चीन में 'जियांग्की', जापान में 'शोगी' और थाईलैंड में 'मकरूक'।
 
चतुरंग
इसका वर्णन कई स्थानों पर मिलता है। कई लोग ऐसा कहते हैं कि रावण और मंदोदरी चतुरंग खेलते थे तो लेखक स्टीवन कलीन के अनुसार चतुरंग का वर्णन भविष्यपुराण में मिलता है। हड़प्पा कालीन सभ्यता में भी चतुरंग के अवशेष मिले हैं। पर मूलतः मन जाता है कि 6वी शताब्दी में गुप्तकाल के समय में इसका प्रचार-प्रसार अधिक हुआ और यह अस्तित्व में आया। यह सैन्य रणनीति और बुद्धि के विकास के लिए बनाया गया था। चतुरंग, चतुरंगिणी सेना से आया था जिसका अर्थ है 4 तत्वों से बनी सेना - गज (हाथी), अश्व (घोड़े), रथ और पैदल सेना। इसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है।
 
कैसे फैला विश्व में
भारत का उस समय अनेक प्राचीन सभ्यताओं से व्यापारिक सम्बन्ध था। यहां से मिस्र से लेकर चीन तक भारत का व्यापारिक आयत-निर्यात होता था। इसी से संस्कृति के साथ-साथ यह खेल भी भारत से बाहर गया। यह पर्शिया (वर्तमान ईरान) में फैल गया और ऐसे ही चीन में भी। जब पर्शिया पर इस्लाम का शासन आया तो वहां से यह धीरे-धीरे यूरोप(स्पेन से) में भी फैल गया।
 
chess नाम की कहानी
ऐसा माना जाता है कि जब यह खेल फ्रांस पहुंचा तो इसे वहां एक नया शब्द मिला - 'ECHES', जिसका अर्थ होता है हार जाना या अनुत्तीर्ण होना। जैसा कि हमने पता है कि अंग्रेजी भाषा के अनेक शब्द दूसरी भाषाओँ से लिए गए हैं, वैसे ही यह फ्रेंच शब्द ECHES अंग्रेजी का 'CHESS' बन गया।
 
चतुरंग में किसे क्या कहा गया है
राजा - राजा
वजीर - सेनापति / मंत्री
हाथी - रथ (रथ सेना)
ऊंट - गाजा, हाथी (गज सेना)
घोडा - अश्व/ शूरवीर (अश्व सेना)
प्यादा - पदुति/ भाटा (पैदल सेना)
 
समय के साथ इस खेल के नियमों में परिवर्तन किया गया। उदाहरण के लिए चतुरंग में पदुति एक चाल ही चलता था पर बाद में यह दो चाल चलने लगा। ऐसे अनेक पतिवर्तन इसमें हुए जिससे इसका मूल स्वरुप बदल गया।

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