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हास्य कविता : अरण्य-कांड

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हिन्दी कविता
शशांक तिवारी
उन्होनें आकर जंगल में, फल की खेती की 
धीरे-धीरे नेटपैक की, तब व्यवस्था भई
 
शूर्पणखा की फोटो पर, लक्ष्मण करे कमेंट
उसने समझा प्यार है, भेजी रिक्वेस्ट तुरंत
 

 
शूपर्णखा की फ्रेंड रिक्वेस्ट, अब आई प्रभु के पास 
इसी बात पर हो गयी, सीता जी नाराज
 
रामचंद्र गुस्से में निकल गए एक टूर
रावण उठाकर फायदा, ले गया मां को दूर
 
रिप्लाई जब ना मिला, कुटिया पहुंचे राम
लक्ष्मण चैटिंग विद उर्मिला, भूले सारे काम
 
डांट खाई प्रभु राम की, शुरू हुई थी खोज
सिग्नल के अभाव में, जीपीएस था लूज 
 
पिय वियोग में रामचंद्र, हैं कितने व्याकुल
सिय तस्वीर को चूम रहे, सबको गए हैं भूल

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