Publish Date: Fri, 19 Jun 2026 (16:37 IST)
Updated Date: Fri, 19 Jun 2026 (16:55 IST)
यहां पढ़ें पितृ दिवस पर पिता के प्यार का महत्व दर्शाती मार्मिक कविता...
वो कभी रोते नहीं, बस अंदर ही अंदर पिघलते हैं,
हमारी छोटी सी खुशी के लिए, वो अंगारों पर चलते हैं।
मां तो रोकर अपने दिल का हाल सुना देती है,
पर वो पिता हैं साहब, जो हर दर्द हंसकर निगलते हैं।
कंधे पर बैठकर जिनके, मैंने दुनिया का मेला देखा,
जब भी आया कोई संकट, उनको आगे अकेला देखा।
उनकी फटी बनियान और घिसे हुए जूते गवाह हैं,
कि बच्चों की ख्वाहिशों के आगे, उन्होंने अपनी हर जरूरत को मरते देखा।
वो हाथ जो कभी डांट में उठते थे, आज कांपने लगे हैं,
वक्त की धूप में उनके बाल, अब चांदी से चमकने लगे हैं।
जो कल तक पूरी दुनिया से अकेले लड़ जाता था,
आज बच्चों की एक छोटी सी डांट से, वो सहमने लगे हैं।
मांगता हूँ जब एक रुपया, वो जेब से सौ का नोट निकालते हैं,
खुद भले भूखे सो जाएं, पर बच्चों का पेट पालते हैं।
अजीब सा गुरूर होता है पिता के साए में जीने का,
वो होते हैं साथ, तो रास्ते के कांटे भी फूल बनकर निकलते हैं।
चाहत नहीं उन्हें किसी महंगे तोहफे की इस 'फादर्स डे' पर,
बस दो पल पास बैठ जाओ, तो उनके चेहरे खिलते हैं।
बेशक खुदा ने मां को जन्नत का दर्जा दिया है,
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
About Writer
वेबदुनिया फीचर टीम
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।....
और पढ़ें