sundarkand
✕

ब्राजील में लूला दा सिल्वा ने कहा- 'लोकतंत्र हमेशा रहेगा, तानाशाही और फासीवाद कभी नहीं'

Webdunia
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 (18:39 IST)
लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े देश और लोकतंत्र ब्राजील में एक नया राजनीतिक इतिहास रचा गया है। वामपंथी नेता लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा (Luiz Inácio Lula da Silva) ने देश के राष्ट्रपति चुनाव के रन-ऑफ (दूसरे दौर) में अपने घोर दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी फ़्लैवियो बोल्सोनारो (Flávio Bolsonaro) को 40 लाख (4 मिलियन) से अधिक मतों के भारी अंतर से हराकर सत्ता में ऐतिहासिक चौथा कार्यकाल हासिल कर लिया है।

'द गार्डियन' की रिपोर्ट के अनुसार, 1964-1985 के सैन्य शासन के बाद से आधुनिक ब्राजील के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब पहले दौर की वोटिंग में पिछड़ने के बाद किसी उम्मीदवार ने दूसरे दौर के रन-ऑफ में ऐसी अभूतपूर्व राजनीतिक वापसी की हो।

"यह भगवान की कृपा और जनता की ताकत है" : लूला का भावुक संबोधन

साओ पाउलो के मध्य में जीत का जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए लाखों समर्थकों के जनसैलाब को संबोधित करते हुए 81 वर्षीय लूला ने कहा: "यह भगवान की कृपा है—और यह आप सभी की वजह से संभव हुआ है। आज का दिन एक ऐतिहासिक दिन है। लोकतंत्र हमेशा रहेगा, तानाशाही अब कभी नहीं। लोकतंत्र हमेशा रहेगा, फासीवाद अब कभी नहीं।"


लूला के स्वास्थ्य मंत्री एलेक्जेंडर पैडिल्हा ने इस जनादेश पर टिप्पणी करते हुए कहा, "यह न केवल ब्राजील के लिए एक बहुत बड़ी जीत है, बल्कि यह शेष लैटिन अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए भी एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश है।"

फ़्लैवियो का हार मानने से इनकार, 'नॉर्थ-ईस्ट' पर फोड़ा भड़ास

अपने पिता और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के नक्शेकदम पर चलते हुए फ़्लैवियो बोल्सोनारो ने चुनावी नतीजों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने लूला की जीत को “साकानागेम” (Sacanagem - जिसका अर्थ 'धोखाधड़ी' या 'बकवास' होता है) करार दिया।

डोनाल्ड ट्रंप की खामोशी और अमेरिका को करारा जवाब

इस चुनाव परिणाम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पूरी तरह चुप्पी छाई हुई है। अमेरिकी प्रशासन बोल्सोनारो की जीत की उम्मीद कर रहा था ताकि दक्षिण अमेरिका में तथाकथित "ऑरेंज वेव" (नारंगी लहर) का विस्तार किया जा सके।

ब्राजील की संसद (कांग्रेस) में हाल ही में चुनी गईं पहली ट्रांसजेंडर सांसद एरिका हिल्टन ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा: "हमने अमेरिकी सरकार के आर्थिक और राजनयिक दबाव को हरा दिया है। उन्होंने सोचा था कि वे हमारे देश को अपना पिछवाड़ा (Backyard) बना सकते हैं, लेकिन ब्राजील की जनता ने उन्हें उनका जवाब दे दिया है।"  ALSO READ: ब्राजील में ट्रंप समर्थित बोल्सोनारो की हार US मिडटर्म चुनाव में कितना बड़ा झटका? भारत पर क्या पड़ेगा असर, समझें पूरा गणित

वैश्विक नेताओं ने किया लूला का स्वागत

डोनाल्ड ट्रंप की चुप्पी के विपरीत, दुनिया भर के राजनीतिक स्पेक्ट्रम के नेताओं ने लूला की जीत का खुलकर स्वागत किया है:
लूला दा सिल्वा की यह जीत केवल ब्राजील के आंतरिक शासन का बदलाव नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ (Global South) में लोकतंत्र के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन (अमेजन के जंगलों की सुरक्षा) के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मोड़ है। जहाँ एक तरफ तानाशाही और फासीवादी ताकतों को बड़ा झटका लगा है, वहीं लूला के सामने अब एक विभाजित देश को एकजुट करने की गंभीर चुनौती होगी।

Related News

Show comments

जरूर पढ़ें

Indian Railways Rules: रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक ट्रेन में मोबाइल चार्जिंग बंद, रेलवे ने क्यों दिया निर्देश?

Electric Scooters : आपके लिए कौन-सा इलेक्ट्रिक स्कूटर बेहतर है? Ola, Honda और TVS के इन इलेक्ट्रिक स्कूटरों की देखें खूबियां

Jio Listing : पहले ही दिन 26.81% उछला जियो का शेयर, निवेशकों की संपत्ति ₹2.76 लाख करोड़ बढ़ी

DA Hike 2026 : केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 3% बढ़ा, पेंशनधारकों को भी दिवाली से पहले तोहफा

MLC Election Results 2026: यूपी, बिहार में MLC चुनाव परिणामों ने चौंकाया, जानिए कहां किसका पलड़ा भारी?

सभी देखें

नवीनतम

LIVE: MLC चुनाव में कांग्रेस का खाता खुला, नागपुर स्नातक सीट जीती

कांग्रेस का पीएम मोदी पर पलटवार, नागपुर और वाराणसी में क्या हुआ?

योगी सरकार की बड़ी पहल, 'यूपी राइज 2026' में युवाओं ने पेश किए 20 से अधिक शानदार स्टार्टअप आइडिया, जानें किसने जीता पहला इनाम

पीएम मोदी का गुजरात दौरा: किसानों को मिलेगी 20 हजार करोड़ की सौगात, केवड़िया में आयोजित होगी एकता परेड

साइक्लोन 'अर्णब' ने बदला मौसम का मिजाज, इन स्थानों पर आज नहीं दिखेगा करवा चौथ का चांद

अगला लेख