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30 से 12 फीसदी पर सिमटी BSP! जानिए UP में कहां शिफ्ट हुआ दलित वोट और 2027 में कौन मारेगा बाजी (UP Dalit Politics Explained)

Webdunia
गुरुवार, 24 सितम्बर 2026 (16:00 IST)
BSP vote share in UP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित मतदाता हमेशा से सत्ता की चाबी रहे हैं। कभी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का एकमुश्त और अभेद्य किला माना जाने वाला यह वोट बैंक अब तेजी से बिखर रहा है। आगामी 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों में छह महीने से भी कम समय बचा है। इस बीच, सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने दलित मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए मोर्चेबंदी शुरू कर दी है।

हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली और उसके बाद कथित 'शुद्धिकरण पूजा' का मुद्दा हो या बीजेपी और सपा का सामाजिक समीकरण साधना—सबकी नज़रें बसपा से छिटक रहे दलित वोटों पर हैं। आइए, 2002 से 2022 तक के चुनावी आंकड़ों के ज़रिए समझते हैं कि यूपी में दलितों की पसंद कैसे बदल रही है और 2027 के लिए क्या समीकरण बन रहे हैं।
बसपा की कमजोर होती पकड़: 30% से 12% पर सिमटा वोट शेयर
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) लंबे समय तक दलितों की पहली और प्राकृतिक पसंद रही है,  लेकिन बीते डेढ़ दशक में बसपा का जनाधार तेजी से घटा है:
इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण यह है कि बसपा से छिटका वोट केवल बिखरा नहीं, बल्कि उसका एक बड़ा हिस्सा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कुछ हद तक समाजवादी पार्टी (सपा) के पास चला गया।
गैर-जाटव दलित : जहां भाजपा ने बनाई सबसे बड़ी सेंध
दलित राजनीति को दो मुख्य हिस्सों में देखा जाता है—जाटव और गैर-जाटव। आंकड़ों से साफ है कि गैर-जाटव दलित समाज बसपा से सबसे तेज़ी से दूर हुआ है और बीजेपी का मजबूत आधार बना है:
जाटव वोट बैंक : मायावती के मजबूत गढ़ में भी लगी दरार
जाटव समुदाय को बसपा का सबसे कैडर वोट माना जाता रहा है, लेकिन अब इसमें भी सेंधमारी स्पष्ट दिखने लगी है:
कांग्रेस और सपा की कोशिशें : कौन बनेगा बसपा का असली विकल्प?
2027 में क्या होगा असली निर्णायक फैक्टर?
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में दलित मतदाता अब किसी एक दल से बंधे हुए नहीं हैं। गैर-जाटव दलितों के बीच भाजपा ने मजबूत बढ़त बनाई है, जबकि जाटव मतदाता अभी भी काफी हद तक बसपा के साथ हैं, लेकिन वहां भी भाजपा और सपा की सेंधमारी जारी है। जो भी दल जाटव और गैर-जाटव दोनों वर्गों में सर्वमान्य अपील बना पाएगा, वही 2027 में लखनऊ की गद्दी का सबसे प्रबल दावेदार होगा।

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