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जया और विजया एकादशी में क्या है अंतर जानिए

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भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की फोटो
Significance of Jaya  n Vijaya Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रतों का विशेष महत्व है, और माघ-फाल्गुन मास के दौरान आने वाली जया और विजया एकादशी श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक और भौतिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत फलदायी मानी जाती हैं। जया एकादशी जहाँ मनुष्य को अनजाने में हुए पापों और 'पिशाच योनि' जैसी दुर्गति से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है, वहीं विजया एकादशी अपने नाम के अनुरूप जीवन की कठिन परिस्थितियों, शत्रुओं और बाधाओं पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद देती है।
 
  1. मास और पक्ष तिथि का समय
  2. एकादशी का संदेश
  3. व्रत का फल
  4. पूजा विधि में सूक्ष्म अंतर
 

यहां इन दोनों के बीच के प्रमुख अंतरों को विस्तार से समझाया गया है:

 

1. मास और पक्ष (तिथि का समय)

 
सबसे बड़ा अंतर उस समय का है जब ये एकादशियां आती हैं:
 

जया एकादशी:


यह माघ मास के शुक्ल पक्ष (फरवरी के आसपास) में आती है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ विशेष रूप से भगवान राम की पूजा की जाती है। यह व्रत विशेष रूप से पापों का नाश करता है और जीवन में सुख-शांति लाने के लिए किया जाता है।

 

विजया एकादशी:


यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष (फरवरी-मार्च के आसपास) में आती है। जया एकादशी के लगभग 15 दिन बाद विजया एकादशी आती है। इस बार 29 जनवरी को जया (अजा) एकादशी मनाई जा रही है तथा 13 फरवरी को विजया एकादशी व्रत रखा जाएगा। इन दोनों एकादशियों का महत्व भी बहुत है, लेकिन इन दोनों में कुछ अंतर है।
 

2. एकादशी का संदेश

यह व्रत पापों का नाश कर व्यक्ति को पिशाच जैसी दुर्गति से बचाता है तथा यह व्रत शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है।
 

3. व्रत का फल

जया एकादशी: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने रावण पर विजय पाने के लिए समुद्र किनारे वकदालभ्य ऋषि के सुझाव पर यह व्रत किया था। यह बाधाओं को दूर करने के लिए किया जाता है। शास्त्रानुसार, जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करता है, उसे मृत्यु के बाद भूत, प्रेत या पिशाच की योनि में नहीं भटकना पड़ता। यह मुक्ति और मानसिक शुद्धता का व्रत है। 
 
विजया एकादशी: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह 'विजय' दिलाने वाली एकादशी है। इस दिन उपवास रखने से कृष्ण भक्ति और धर्म की ओर ध्यान केंद्रित होता है। यह व्रत व्यक्ति को पापों से मुक्ति और जीवन में विजय की प्राप्ति देता है
 

4. पूजा विधि में सूक्ष्म अंतर

हालांकि दोनों में भगवान विष्णु (नारायण) की पूजा होती है, लेकिन कुछ सूक्ष्म अंतर हैं:
 
जया एकादशी में सात्विकता और जागरण पर अधिक जोर दिया जाता है ताकि इंद्रियों पर विजय प्राप्त की जा सके।
 
विजया एकादशी में विशेष रूप से एक कलश की स्थापना की जाती है, उस पर सप्तधान्य (सात अनाज) रखे जाते हैं और श्री हरि की मूर्ति स्थापित कर पूजा की जाती है।
 
संक्षेप में कहा जाए तो यदि आप अपने अनजाने में हुए पापों से मुक्ति और सद्गति चाहते हैं, तो जया एकादशी का महत्व अधिक है। वहीं, यदि आप जीवन की किसी बड़ी बाधा या प्रतियोगिता में सफलता (विजय) चाहते हैं, तो विजया एकादशी का संकल्प लिया जाता है।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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