Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, क्या है इसका महत्व?

Advertiesment
हमें फॉलो करें आंवला एकादशी पूजन से संबंधित श्रीहरि नारायण का मनभावन फोटो

WD Feature Desk

, मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 (11:15 IST)
Phalgun Shukla Amalaki Ekadashi: हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार आमलकी एकादशी, जिसे आंवला एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। आमलकी एकादशी का संबंध भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष से है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु का प्रिय और पवित्र माना गया है।ALSO READ: कुंभ राशि में चार ग्रहों का जमघट: राहु की चाल और 5 राशियों का 'गोल्डन टाइम'

वर्ष 2026 में यह व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। आमलकी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है, फिर भगवान विष्णु की मूर्ति के पास या आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करके भगवान को आंवला अर्पित करें और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना लाभकारी होता है। शाम को घी का दीपक जलाकर एकादशी व्रत कथा का श्रवण करना चाहिए।
 
  • आमलकी एकादशी का शुभ मुहूर्त 2026
  • आमलकी एकादशी का महत्व
  • होली का प्रारंभ
  • आमलकी एकादशी FAQ

आइए यहां जानते हैं आमलकी एकादशी के बारे में....

 

आमलकी एकादशी का शुभ मुहूर्त 2026

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समय इस प्रकार है:
 
एकादशी तिथि प्रारंभ: 27 फरवरी 2026, 12:33 ए एम से, 
 
एकादशी तिथि समाप्त: 27 फरवरी 2026, 10:32 पी एम तक। 
 
उदयातिथि के अनुसार आमलकी एकादशी व्रत 27 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा।
 

व्रत पारण (व्रत खोलने का समय): 28 फरवरी 2026 को सुबह 06:47 से 09:06 के बीच।

पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 08:43 पी एम।
 

आमलकी एकादशी का महत्व

धार्मिक शास्त्रों में इस एकादशी को 'मोक्षदायिनी' माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ आंवले के पेड़ की पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि सृष्टि की रचना के समय भगवान विष्णु ने आंवले को आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया था और इसके हर अंग में देवताओं का वास होता है। चूंकि 'आमलकी' का अर्थ आंवला है, जिसे आयुर्वेद में 'अमृत फल' कहा गया है।

इस दिन आंवले का सेवन और दान करना आरोग्य यानी अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि प्रदान करता है। पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत को करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मृत्यु के पश्चात वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है। 
 

होली का प्रारंभ


वाराणसी (काशी) में इसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं। माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी आए थे, इसलिए यहां से होली के उत्सव की औपचारिक शुरुआत हो जाती है।
 

आमलकी एकादशी FAQ

 
1. आमलकी एकादशी क्या है?
आमलकी एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और आंवला (आमलकी) वृक्ष की पूजा की जाती है।
 
2. आमलकी एकादशी कब आती है?
यह व्रत हर वर्ष फाल्गुन शुक्ल एकादशी को आता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार इसकी तिथि हर साल बदलती रहती है।
 
3. आमलकी एकादशी का महत्व क्या है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसे अत्यंत पुण्यदायी एकादशी माना जाता है।

4. व्रत का पारण कब करना चाहिए?
एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त के अनुसार व्रत का पारण करना चाहिए।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: नकारात्मक ऊर्जा का अंत: घर में रोज जलाएं इस चीज का धुआं, दूर होगी कलह और क्लेश


photo courtesy:  WD/AI

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

नकारात्मक ऊर्जा का अंत: घर में रोज जलाएं इस चीज का धुआं, दूर होगी कलह और क्लेश