Biodata Maker

क्यों मनाते हैं बकरीद / ईद उल-अजहा का त्योहार, जानिए इतिहास

WD Feature Desk
सोमवार, 17 जून 2024 (09:47 IST)
Highlights 
 
 
Highlights 
 
* अल्लाह की रजा के लिए दी जाती हैं कुर्बानी।  
* इस्लाम धर्म के खास त्योहारों में से एक है बकरीद। 
* ईद उल अजहा के बारे में जानें।  

ALSO READ: eid ul adha : 2024 में कब है ईद उल-अजहा
 
Eid al-Adha 2024 : ईद-उल-अजहा या बकरीद इस्लाम धर्म के खास त्योहारों में से एक है। हर साल चांद की दसवीं तारीख को ईद-उल-अजहा या बकरीद का त्योहार मनाया जाता है। 
 
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2024 में ईद उल अजहा 17 जून सोमवार को मनाया जा रहा हैं। 
 
क्यों जरूरी हैं बकरीद : मान्यतानुसार यह एक जरिया है जिससे बंदा अल्लाह की रजा हासिल करता है। इसीलिए बकरीद/ ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी दी जाती है। 
 
माना जाता हैं कि बेशक कुर्बानी का गोश्त अल्लाह को नहीं पहुंचता है, बल्कि वह तो केवल कुर्बानी के पीछे बंदों की नीयत को देखता है। अल्लाह को पसंद है कि बंदा उसकी राह में अपना हलाल तरीके से कमाया हुआ धन खर्च करे।
 
क़ुरबानी का इतिहास- यदि कुर्बानी का इतिहास देखें तो इब्रा‍हीम अलैय सलाम एक पैगंबर थे, जिन्हें ख्वाब में अल्लाह का हुक्म हुआ कि वे अपने प्यारे बेटे इस्माईल जो कि बाद में पैगंबर हुए को अल्लाह की राह में कुर्बान कर दें। 
 
यह इब्राहीम अलैय सलाम के लिए एक इम्तिहान था, जिसमें एक तरफ अपने बेटे से मुहब्बत थी और दूसरी तरफ अल्लाह का हुक्म था। तब इब्राहीम अलैय सलाम ने सिर्फ और सिर्फ अल्लाह के हुक्म को पूरा किया और अल्लाह को राजी करने की नीयत से अपने लख्ते जिगर इस्माईल अलैय सलाम की कुर्बानी देने को तैयार हो गए। 
 
अल्लाह रहीमो करीम है और वह तो दिल के हाल जानता है, जैसे ही इब्राहीम अलैय सलाम छुरी लेकर अपने बेटे को कुर्बान करने लगे, वैसे ही फरिश्तों के सरदार जिब्रील अमीन ने बिजली की तेजी से इस्माईल अलैय सलाम को छुरी के नीचे से हटाकर उनकी जगह एक मेमने को रख दिया। इस तरह इब्राहीम अलैय सलाम के हाथों मेमने के जिब्हा होने के साथ पहली कुर्बानी हुई। 
 
इसके बाद जिब्रील अमीन ने इब्राहीम अलैय सलाम को खुशखबरी सुनाई कि अल्लाह ने आपकी कुर्बानी कुबूल कर ली है और अल्लाह आपकी कुर्बानी से राजी है। अतः अल्लाह बंदे की नीयत को खूब समझता है, जब बंदा अल्लाह का हुक्म मानकर महज अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी करेगा तो यकीनन वह अल्लाह की रजा हासिल करता है। और इस तरह कुर्बानी देना ही इस ईद का असली मकसद हैं।

ALSO READ: कश्मीर में ईद पर होगी 3 लाख से ज्यादा भेड़ों की कुर्बानी
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

Holi puja remedies 2026: होलिका दहन के दिन करें मात्र 5 उपाय, संपूर्ण वर्ष रहेगा शुभ

कब तक पीएम रहेंगे नरेंद्र मोदी? इस भविष्यवाणी ने उड़ाई सबकी नींद, जानें वो 3 बड़ी बातें

होली पर गुलाल गोटा की परंपरा कहां से आई? मुस्लिम कारीगरों से क्या है इसका रिश्ता

चंद्र ग्रहण के दिन भारत में कहां-कहां दिखेगा ग्रहण? जानिए पूरी लिस्ट

काशी में होली की अनोखी शुरुआत: मसान होली सहित जानिए 5 चौंकाने वाली परंपराएं

सभी देखें

धर्म संसार

कब छ्टेंगे युद्ध के बादल, क्या 'अंगारक योग' है कारण?

भारत-पाकिस्तान तनाव पर ग्रह गोचर का संकेत, क्या पीओके को लेकर बदल सकती है स्थिति?

Papmochani Ekadashi 2026. पापमोचनी एकादशी कब है?

वक्री गुरु का 3 राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव, ये 3 उपाय करके वर्ष को बनाएं शुभ

Sheetala Mata Puja 2026: कब है शीतला अष्टमी का त्योहार? जानिए तिथि, महत्व और पूजा विधि

अगला लेख