Hanuman Chalisa
✕

21 जुलाई: ईद-उल-जुहा : बलिदान का मुबारक त्योहार है बकरीद, क्या है इतिहास

Webdunia
Eid al-Adha 2021
 
21 जुलाई ईद-उल-जुहा पर्व मनाया जाएगा। देश के विभिन्न स्थानों पर चांद देखने के हिसाब से चांद की दसवीं तारीख को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार को इम्तेहान और बलिदान का प्रतीक भी कहा जाता है।

ईद उल अदहा, ईद-उल-अजहा अथवा बकरीद का त्योहार इस्लाम समुदाय का पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। इसी दिन मुसलमानों के पैगंबर हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने प्रिय बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम को अल्लाह के नाम पर कुर्बान कर दिया था तभी से हर साल बकरीद यानी 'ईद-उल-अजहा' का त्योहार मनाया जाता है।
 
ईद-उल-अजहा के इस्लामी माह को कुर्बानी का महीना भी कहते हैं। यह उस माह की 10 तारीख को मनाया जाता है, जो 3 दिनों तक जारी रहता है। इसमें इस्लाम धर्म के अनुयायी जानवरों की कुर्बानी देते हैं।
 
कहा जाता है कि हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को कोई औलाद नहीं थी और जब काफी उम्र बीत जाने पर भी उनको कोई औलाद नहीं हुई तो वे बैतूलाह मुकद्दस (मक्का शरीफ) की दीवार पकड़कर इतना रोए कि सारी दीवार भीग गई और अल्लाह की ओर से उनकी दुआ पूरी हुई।
 
कुछ ही दिन बाद उनके यहां एक पुत्र ने जन्म लिया जिसका नाम 'इस्माइल' रखा गया। हजरत इब्राहीम अपने पुत्र को बहुत प्यार करते थे। जब तक पुत्र को देख न लेते, उन्हें चैन नहीं मिलता था। इन्हीं सबको लेकर अल्लाह ने उनकी पहली परीक्षा लेने के मकसद से उनके सपने में कहा- 'ऐ इब्राहीम, तुम अपनी पत्नी और बच्चे को सफसखा पहाड़ी के बीच मरुस्थल में छोड़ आओ।'
 
दूसरे दिन हजरत इब्राहीम ने ऐसा ही किया। अपनी पत्नी और बच्चे को ले जाकर बीच मरुस्थल में छोड़ दिया और वापस चले आए। रेतीली गर्म हवाओं के चलने से मां-बेटे कि जान पर बन आई। पुत्र इस्माइल कि जबान प्यास से सूखने लगी, तो मां की आंखें भर आईं और वे इधर-उधर पानी की तलाश में दौड़ने लगीं।
 
उस समय प्यास से तड़प रहे बालक इस्माइल के रेत में जहां-जहां पांव पड़े, वहां-वहां मीठे पानी का फव्वारा निकलना शुरू हो गया, जो आज भी मक्का शरीफ (अरब) में है। इस फव्वारे को 'आब-ए-ज़मज़म' कहते हैं। यह पानी बोतल में काफी दिन रहने के बावजूद सड़ता नहीं है।
 
दूसरी परीक्षा में अल्लाह ने उनसे अपनी सबसे प्यारी वस्तु कुर्बान करने का हुक्म दिया, तो वे अपने पुत्र इस्माइल अलैहिस्सलाम (जिनका नाम इस घटना के बाद जबीं-उल्लाह पड़ा) को लेकर एक पहाड़ी की ओर चल पड़े।
 
रास्ते में हजरत इस्माइल ने पूछा- 'अब्बा हुजूर, आप मुझे कहां ले जा रहे हैं?
 
 
हजरत इब्राहीम ने जवाब दिया- 'मैं तुम्हें अल्लाह के नाम पर कुर्बान करने ले जा रहा हूं।'
 
इस पर पुत्र ने प्रसन्नतापूर्वक कहा- 'आप और हम बड़े खुशनसीब हैं, जो अल्लाह ने आपसे मेरी कुर्बानी मांगी।'
 
जब सफसखा पहाड़ी आ गई तो बेटे हजरत इस्माइल ने अपने पिता से कहा- 'वालिद साहब, आप मेरी और अपनी आंखों पर पट्टी बांध दें ताकि मेरी गर्दन पर छुरी चलाते समय आपको दया न आ जाए और मैं मौत से डर न जाऊं।' यह सुनकर हजरत इब्राहीम ने ऐसा ही किया और हजरत इस्माइल की गर्दन पर छुरी चला दी। 
 
इस त्योहार को अगर इम्तेहान और बलिदान का प्रतीक कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि कहते हैं कि उसी वक्त अल्लाह की तरफ से एक दुम्बा (जानवर) हजरत इस्माइल की जगह आ खड़ा हुआ और छुरी उसी पर चली। हजरत इस्माइल पर एक खरोंच तक न आई तभी से यह मुसलमान कुर्बानी प्रेम और सौहार्द से करते हैं। 
- संजय सिन्हा

ALSO READ: ईद उल अदहा : जानिए कैसे और क्यों मनाई जाती है बकरीद

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

08 November Birthday: आपको 8 नवंबर, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज 08 नवंबर, 2026 का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का भविष्यफल

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 08 नवंबर 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

श्री महालक्ष्मी चालीसा | Shri Mahalakshmi Chalisa

Tulsi Vivah 2026: देवउठनी एकादशी पर ऐसे करें तुलसी-शालिग्राम विवाह की तैयारी, चमकेगा सौभाग्य

सभी देखें

धर्म संसार

Chhath Puja 2026 Checklist: नहाय-खाय से पारण तक: ऐसे करें छठ पूजा की संपूर्ण तैयारी, कोई भूल न हो

गोवर्धन पूजा के दिन सुहाग पड़वा क्यों मनाते हैं, क्या है इसका महत्व, भेजिए ये 20 सुंदर शुभकामनाएं

Diwali 2026: दिवाली की रात चुपचाप कर लें ये 5 गुप्त प्रयोग, साल भर होगी अपार धन की वर्षा

भाई दूज पर क्यों लगाया जाता है तिलक? बहनें क्यों खिलाती हैं भाई को पान? जानें इसका पौराणिक महत्‍व

दिवाली के पहले धनतेरस पर बनाएं कुबेर-लक्ष्मी 'धन वर्षा पोटली': वर्षभर घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि

अगला लेख