Hanuman Chalisa

नवरात्रि देवी शक्तिपीठ : चट्टल भवानी शक्तिपीठ

Webdunia
Shardiya Navratri : देवी भागवत पुराण में 108, कालिकापुराण में 26, शिवचरित्र में 51, दुर्गा शप्तसती और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है। साधारत: 51 शक्ति पीठ माने जाते हैं। तंत्रचूड़ामणि में लगभग 52 शक्ति पीठों के बारे में बताया गया है। प्रस्तुत है माता सती के शक्तिपीठों में इस बार चट्टल शक्तिपीठ के बारे में जानकारी।
 
कैसे बने ये शक्तिपीठ : जब महादेव शिवजी की पत्नी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई। शिवजी जो जब यह पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया। बाद में शिवजी अपनी पत्नी सती की जली हुई लाश लेकर विलाप करते हुए सभी ओर घूमते रहे। जहां-जहां माता के अंग और आभूषण गिरे वहां वहां शक्तिपीठ निर्मित हो गए।
 
चट्टल- भवानी : चट्टल शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है। बांग्लादेश में चिट्टागौंग (चटगांव) जिला से 38 किलोमीटर दूर सीताकुंड स्टेशन के निकट समुद्रतल से 350 मीटर की ऊंचाई पर चंद्रनाथ पर्वत शिखर पर छत्राल (चट्टल या चहल) में माता की दायीं भुजा गिरी थी। इसकी शक्ति भवानी है और भैरव को चंद्रशेखर कहते हैं। यहां चंद्रशेखर शिव का भी मंदिर है। यहीं पर पास में ही सीताकुण्ड, व्यासकुण्ड, सूर्यकुण्ड, ब्रह्मकुण्ड, बाड़व कुण्ड, लवणाक्ष तीर्थ, सहस्त्रधारा, जनकोटि शिव भी हैं। बाडव कुण्ड से निरंतर आग निकलती रहती है।

ALSO READ: नवरात्रि देवी शक्ति पीठ : वृंदावन का उमा शक्तीपीठ

ALSO READ: नवरात्रि देवी शक्ति पीठ : 'महामाया मंदिर' कश्मीर का जागृत शक्तिपीठ

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

आदि शंकराचार्य का काल निर्धारण: 508 ईसा पूर्व या 788 ईस्वी में हुए थे शंकराचार्य?

अचानक बदलने वाली है इन 5 राशियों की तकदीर, ग्रहों का बड़ा संकेत

नास्त्रेदमस को टक्कर देते भारत के 7 भविष्यवक्ता, जानें चौंकाने वाली भविष्यवाणियां

मांगलिक दोष और वैवाहिक जीवन: क्या वाकई यह डरावना है या सिर्फ एक भ्रांति?

करियर का चुनाव और कुंडली का दसवां भाव: ग्रहों के अनुसार चुनें सही कार्यक्षेत्र

सभी देखें

धर्म संसार

25 April Birthday: आपको 25 अप्रैल, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 25 अप्रैल 2026: शनिवार का पंचांग और शुभ समय

त्रिशूर पूरम 2026: केरल की सांस्कृतिक विरासत पूरमों के पूरम का भव्य शंखनाद

सिद्धिलक्ष्मी जयंती 2026: सफलता और समृद्धि के संगम का महापर्व

सीता नवमी 2026: माता जानकी के इन 5 उपायों से घर में बरसेगी खुशहाली

अगला लेख