Publish Date: Thu, 29 Apr 2021 (10:55 IST)
Updated Date: Thu, 29 Apr 2021 (11:00 IST)
मुंबई। कोरोना काल में एक और महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में ऑक्सीजन संकट दिखाई दे रहा है वहीं दूसरी ओर नंदूरबार के जिलाधिकारी की कुछ महीने पहले ऑक्सीजन संयंत्र लगाने की दूरदर्शिता से जिले में कोविड-19 की स्थिति से निपटने में वक्त मदद मिली।
कोविड-19 की पहली लहर के कमजोर पड़ने पर भी नंदूरबार के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र भरुद पिछले सितंबर में सरकारी अस्पताल में 600 लीटर प्रति मिनट क्षमता वाले तरलीकृत ऑक्सीजन संयंत्र को लगवाने में व्यस्त थे। नंदूरबार मुंबई से करीब 400 किलोमीटर दूर है।
2013 बैच के आईएएस अधिकारी ने माना कि आदिवासी बहुल जिले में इस तरह की सुविधा की कमी थी और ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए अन्य जगहों पर निर्भरता से कोविड-19 से मौत के मामलों में वृद्धि होगी। उनका यह फैसला इस वक्त सही साबित हो रहा है।
भरुद ने बताया कि जिला प्रशासन ने 2 और संयंत्र लगाए हैं - एक सरकारी अस्पताल में और एक जिले के शहादा शहर में। दोनों पर करीब 85 लाख रुपये की लागत आई है और दोनों संयंत्र क्रमश: फरवरी और मार्च में लगाए गए। नंदूरबार प्रशासन ने निजी अस्पतालों को इसका अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने भी दो ऑक्सीजन संयंत्र लगाये हैं।
उन्होंने कहा, कुल मिलाकर जिले में इस वक्त 5 ऑक्सीजन संयंत्र काम कर रहे हैं और वे हर दिन 48 से 50 लाख लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन कर रहे हैं। (भाषा)