Publish Date: Sun, 24 May 2020 (13:22 IST)
Updated Date: Sun, 24 May 2020 (13:25 IST)
पूरी दुनिया को संदेह है कि चीन के वुहान से ही कोरोना वायरस की शुरुआत हुई है। इसके बाद से ही वुहान में मौजूद वायरोलॉजी इंस्टिट्यूट भी विवाद में है।
लेकिन इसी बीच अब इंस्टिट्यूट ने दावा किया है कि उनके पास बैट से निकले कोरोना वायरस के तीन लाइव स्ट्रेन मौजूद थे, लेकिन इनमें से किसी का भी मौजूदा कोरोना संक्रमण से कोई संबंध नहीं है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस चमगादड़ से निकला था। इसके बाद यह इंसानों में फैला। लेकिन वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की निदेशक ने सरकारी टीवी सीजीटीएन पर इसे पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे को भी पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है।
दरअसल एक इंटरव्यू में निदेशक वांग येनी ने यह बात कही है। 13 मई को यह इंटरव्यू किया गया था, जो शनिवार रात को प्रसारित किया गया। इसमें निदेशक वांग येनी कहती हैं कि सेंटर के पास चमगादड़ों से निकाले गए गए कोरोना वायरस के स्ट्रेन थे। उन्होंने कहा,
'हमारे पास जिंदा वायरस के तीन स्ट्रेन मौजूद हैं। लेकिन नोवेल कोरोना वायरस और उनमें समानता सिर्फ 79.8 फीसदी ही है’
प्रोफेसर शी जेंग्ली के नेतृत्व में एक टीम 2004 से ही चमगादड़ से निकले कोरोना वायरस पर शोध कर रही है। वह सार्स के स्रोत को ढूंढ रही है। शी ने बताया,
'हमें पता है कि नोवेल कोरोना वायरस के जीनोम सार्स से सिर्फ करीब 80 फीसदी ही मैच करते हैं। यह एक बड़ा अंतर है। इसलिए प्रोफेसर शी के शोध में उन्होंने ऐसे वायरस पर ध्यान नहीं दिया जिनमे सार्स जैसी समानता कम है।'
इधर वांग ने कहा,
'दूसरों की तरह हमें भी वायरस की मौजूदगी के बारे में नहीं पता था। फिर ऐसे में वह कैसे लैब से लीक हो सकता है जब वह हमारे पास था ही नहीं’
दरअसल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने दावा किया था कि कोरोना वायरस चीन के वायरोलॉजी इंस्टिट्यूट से फैले हैं। अमेरिका सहित कई देशों ने मांग की है कि इस बात की जांच की जाए कि कोरोना किस तरह से पूरी दुनिया में फैला।