दुनियाभर में पसरे कोरोना वायरस पर आलेख लिखकर अरुधंति रॉय ट्विटर पर ट्रोल्स के निशाने पर आ गई। उनका आलेख पढ़कर ज्यादातर लोग ने उनकी जमकर आलोचना कर डाली।
दरअसल रॉय ने राजनीति से लेकर गरीबी और स्वास्थ्य आदि से जोड़ते हुए एक लेख लिखा है। इसी लेख के बाद उनका नाम ट्वीटर पर ट्रेंड करने लगा। जिसमें लोगों ने उन्हें खूब आलोचना की।
कुछ यूजर्स ने अरुधंति रॉय के लेख को लॉकडाउन के दौरान टाइमपास बताया। यूजर्स ने लिखा अरुधंति रॉय घर में बैठे-बैठे एक नई दुनिया की कल्पना कर रही हैं। जो फिक्शन स्टोरी की तरह है।
एक यूजर ने लिखा कि अगर अरुधंति रॉय देश की प्रधानमंत्री होती तो क्या करती।
सबसे दुखद बात है कि अरुधंति रॉय ने अपने आलेख में तबलिगी जमात के लोगों की तरफदारी कर डाली, जिसे लेकर उन्हें लोगों ने ज्यादा निशाना बनाया।
अरुधंति ने अपने आर्टिकल में लिखा कि तबलीगी जमात के लोगों में कोरोना वायरस की पु्ष्टि के बाद ऐसा जताया जा रहा है मानो उन्होंने जानबूझकर यह वायरस फैलाया है। जैसे वायरस फैलाना तबलिगी जमात का मकसद ही हो।
इस पर लोगों ने लिखा कि काश, वो खुद तबलिगी जमात वालों के साथ बैठी होती। कुछ लोगों ने तो यह भी कह डाला कि पब्लिसिटी के लिए उन्होंने यह आलेख लिख डाला, क्योंकि लंबे समय से वो खबरों में नहीं आ रही है। तो किसी ने लिख दिया कि लगता है आईएसआई की तरफ से उन्हें यह सब करने के पैसे मिल गए हैं। यूजर्स ने यहां तक लिख डाला कि आप हमारे धर्म को बदनाम करना बंद कर दो नहीं, तो जो सम्मान हम आपको देते हैं, वो मिलना बंद हो जाएगा।
क्या लिखा है अरुंधती रॉय ने?
अरुंधति रॉय ने अपने आर्टिकल कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने पहले मोदी सरकार की आलोचना की और कहा कि बिना योजना और तैयारी के उन्होंने लॉकडाउन की घोषणा कर दी। इससे गरीब लोग परेशान हो गए।
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नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्म में मास्टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्हें फिल्ड रिपोर्टिंग का अच्छा-खासा अनुभव है।
उन्होंने अखबार....
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