Publish Date: Sun, 23 Nov 2014 (22:12 IST)
Updated Date: Mon, 24 Nov 2014 (19:08 IST)
- सीमान्त सुवीर
महेन्द्र सिंह बेदी उन लोगों के लिए एक प्रेरणा साबित हो सकते हैं, जो अपने जीवन के कीमती साल नौकरी को समर्पित करने के बाद, जब रिटायर होते हैं तो यह सोचते हैं कि अब आगे क्या...? आराम या फिर दादा-दादी की भूमिका निभाते हुए पोते-पोतियों के बीच समय गुजारना? या फिर इनसे भी आगे बढ़कर जिंदगी के हसीन पलों को खुशी के साथ बिताते हुए उम्र गुजारना...
बेदी 1 जुलाई 1991 को भोपाल में मध्यप्रदेश के लोक स्वास्थय यांत्रिकी विभाग (पीएचई) से सेवानिवृत्त हुए और 1 नवम्बर 1993 में इंदौर में आकर बस गए। बाद में उन्होंने क्लास वन ऑफिसर्स का इंदौर में एक क्लब बनाया। जब यह क्लब बना था, तब उसमें केवल 7 सदस्य थे लेकिन आज उनकी संख्या बढ़कर 32 हो गई है।
पहले इस क्लब के सदस्य शाम के वक्त ही ग्राउंड में मिला करते थे, लेकिन बाद यह महसूस किया गया कि क्यों न परिवार की महिलाएं भी एकसाथ मिलें। इस तरह 2009 से वर्ष में एक बार मिलन समारोह के जरिए होटल में दोपहर का भोजन क्लब के सभी सदस्य द्वारा एकसाथ करने की शुरुआत हुई। इस शुरुआत के काफी सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिलने लगे।
'कल्पनालोक निवासी' और इंदौर फेरो क्लब के अध्यक्ष बेदी ने एक विशेष मुलाकात में बताया कि इंदौर में हमारे क्लब से प्रेरणा लेकर मध्यप्रदेश में चार और क्लब बन गए। भोपाल में 17 मार्च 1996 को शुरुआत हुई। इसके बाद क्लास वन ऑफिसर्स के जबलपुर, ग्वालियर, रायपुर में भी क्लब स्थापित हुए। इन सभी को भोपाल के क्लब ने नाम दिया 'फेरो क्लब'।
बेदी ने बताया कि 'फेरो क्लब' का महासम्मेलन भोपाल में गत वर्ष आयोजित किया था जबकि इस वर्ष यह सम्मेलन की मेजबानी इंदौर ने की, जिसमें पुरुषों के साथ रिटायर महिलाओं ने भी गर्मजोशी के साथ शिरकत की।
इस सम्मेलन की दूसरी जगहों से आईं महिलाओं ने काफी प्रशंसा की। इसमें प्रदेश के चारों 'फेरो क्लब' से 88 बुजुर्ग महिला-पुरुषों ने हिस्सा लिया। अगले वर्ष प्रदेश का यह महासम्मेलन जबलपुर में आयोजित होगा।
उन्होंने बताया कि हम अपने सेवाकाल के दौरान विभिन्न शहरों में आपस में मिलते रहते थे लेकिन रिटायरमेंट के बाद अपनी पसंद के शहरों में बसने की वजह से मिलना नहीं होता था। हम बाहर जरूर जाते हैं, अपने बच्चों के पास जो देश के किसी शहर में या विदेश में रहते हैं लेकिन हमउम्र के दोस्तों से न मिल पाने की बेकरारी दिल में ही रह जाया करती थी। भोपाल का फेरो क्लब बधाई का पात्र है, जिसने महासम्मेलन किया और मैं उम्मीद करता हूं कि आने वाले वक्त में भी प्रदेश के अन्य 'फेरो क्लब' इस परंपरा को निभाएंगे।
बेदी के अनुसार इस क्लब की विशेषता यही है कि इसका हर सदस्य यह अनुभव नहीं करे कि वह जिंदगी से रिटायर हो गया है बल्कि उसे हमउम्र के दोस्तों के साथ यह महसूस हो कि अब जिंदगी की दूसरी पारी की शुरुआत हुई है। मौत तो सभी को एक न एक दिन आनी है, लेकिन उससे पहले जिंदगी को जी लिया जाए...
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Publish Date: Sun, 23 Nov 2014 (22:12 IST)
Updated Date: Mon, 24 Nov 2014 (19:08 IST)