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यूथ में बढ़ा साइबर एडिक्शन

नॉलेज के लिए नेट का सहारा

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कैम्पस बज
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कॉलेज शुरू होते ही अधिकांश युवा नॉलेज बढ़ाने नेट का सहारा ले रहे हैं। कॉलेज में या घर पर बैठकर नेट से जानकारी एकत्र करने के साथ ही युवा साइबर कैफे को अधिक प्रीफरेंस देने लगे है। यही वजह है कि अब युवाओं में साइबर कैफे का प्रचलन काफी तेजी से बढ़ा है, जिसके चलते युवाओं को काफी हेल्प मिली है। अपने विषय से जुड़ी जानकारी एकत्र करने के साथ ही यूथ अब मनोरंजन के लिए भी इसका सहारा लेने लगे हैं।

रिफरेंस बुक के लिए तीन से चार घंटे
सिलेबस तैयार करने के लिए घंटों रिफरेंस बुक्स ढूँढने और पन्ने पलटने पड़ते थे। अब एक क्लिक से सिलेबस से जुड़ी जानकारी मिनटों में प्राप्त की जा सकती है। एनआईटी के स्टूडेंट्स पकंज जायसवाल कहते है कि नोट्स तैयार करने या नॉलेज पाने के लिए नेट सर्फिंग बेहतरीन आप्शन है। इससे वे सीनियर्स से नोट्स माँगने और लाइब्रेरी के चक्कर काटने से बच जाते हैं।

इसमें विषय से जुड़ी जानकारी सारी जानकारी मिल जाती है। इसके लिए मैं रैग्यूलर नेट पर बैठता हूँ। साइंस कालेज की स्टूडेंट चंचल वर्मा फ्रैंड्स के साथ रोजाना साइबर कैफे जाती हैं। वे लगभग 3 से 4 घंटे नेट पर बिताती है। उनका कहना है कि बहुत ही कम दाम में अधिक जानकारी एकत्र करने का यह सबसे अच्छा जरिया है। साइंस के स्टूडेंट्स को नेट फ्रेंडली तो होना ही चाहिए, फिर चाहे इसके साइड इफेक्ट ही क्यों न हो। आज के जमाने में जो नेट से दूरी बना कर रखता है वह दुनिया से कट से जाता है।

पढ़ने का शौक होता पूरा
डिग्री गर्ल्स बीए की स्टूडेंट मीनाक्षी अग्रवाल बताती है कि उन्हें तरह-तरह की नॉवेल और बुक्स पढ़ने का शौक है। इसके लिए वे ई-लाइब्रेरी का सहारा लेती हैं। कई बार तो नॉवेल को खत्म करने में चार से पाँच घंटे लग जाते हैं।नेट पर चैटिंग करने व नए दोस्त बनाने की शौकिन बीसीए की स्टूडेंट्स नेहा उपाध्याय बताती है कि खाली समय में वे अपने दोस्तों से देर तक चैटिंग करती रहती है।

ट्वि‍टर और चैटिंग के लिए भी...
युवाओं में बढ़ता ट्वि‍टर, फेस बुक व चैटिंग का क्रेज उन्हें इस ओर आकर्षित करता है। ब्वॉयज के साथ गर्ल्स भी इसमें काफी रुचि लेती हैं। सुश्री शर्मा के मुताबिक कुछ स्टूडेंट्स ऐसे है जो केवल चैटिंग करने के लिए 2 घंटे से भी ज्यादा समय लेते है। कई स्टूडेंट्स तो शाम को आते हैं और देर रात तक बैठते हैं, क्योंकि दिन में कॉलेज होता है। उन्हें अपनी प्रॉब्लम सॉल्व करने में यही वक्त मिलता है।

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पावरफुल जीके और जॉब की डिमांड
नई जगहों पर घुमना और वाइल्ड लाइफ वाचिंग के शौकीन एमजे के स्टूडेंट्स गौरव शर्मा कहते हैं कि चूँकि मेरा सबजेक्ट वाइड है। इसमें पावरफुल जीके जरूरी है। यही वजह है कि मेरे लिए नेट पर सर्फिंग इंपार्टेंट है। मुझे जो भी जगह पसंद आती है, उसकी डिटेल निकाल हूँ। दुनिया की सैर के लिए मैं घंटों नेट पर बैठ सकता हूँ।

हाँलाकि मुझे इसके लिए साइबर कैफे जाना पड़ता है, लेकिन कोई बात नहीं। डीफार्मा की स्टूडेंट संध्या वर्मा विषय से जुड़ी जानकारी लेने के लिए 2 से 3 घंटे टॉपिक पर सर्चिंग करती है। उनके मुताबिक प्रोजेक्ट व एग्जाम के वक्त एग्जामपल देने में इससे हेल्प मिलती है। कम समय और कम खर्च में ढेर जानकारी मिनटों में मिल जाती है।

आजकल युवा हर काम में लैपटॉप और कम्प्यूटर की हेल्प लेने लगे हैं, जिससे फिजिकल एक्टीविटी न के बराबर होती है। यही वजह है कि ज्यादातर युवाओं में सरवाइकल, मेंटल स्ट्रेस, ड्राय आई जैसी कई तरह की प्रॉब्लम पाई जाती है। रात में घंटों कम्प्यूटर पर काम करने और देर से सोने की वजह से ही ज्यादातर युवाओं में नींद न आने की शिकायतें देखने को मिल रही है।

इससे बचने के लिए लगातार काम न करें बल्कि बीच-बीच में आराम करें। इससे आंखों को भी आराम मिलता है और काम में भी गलतियाँ होने की संभावना कम होती है।

काम करना मजबूरी है तो बीच-बीच में ब्रेक जरूर लेते रहें। कम्प्यूटर पर काम करने के बाद टीवी देखने और मोबाइल से बात करने से बचने की कोशिश करें। इससे तनाव और अधिक बढ़ता है। इसके लिए चाहे तो म्यूजिक का सहारा लें या फिर गार्डन में जाकर टहलें। ठंडे पानी से मुँह धोएँ और थोड़ा रेस्ट करने के बाद ही काम करें।

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