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एक जीवित ग्रह की पुकार

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कैंपस
'मैं धरती हूँ ब्रम्हाण्ड का सबसे सुंदर, रंगीन और इकलौता जीवित ग्रह, एक ऐसा ग्रह जिसकी कद्र उसके अपनों को ही नहीं'। रोती, बिलखती अपनों से ही अपनी और अपनों के जीवन की रक्षा का आह्वान करती धरती को सोमवार सुबह शहर के चंद लोगों ने 'जीवंत' देखा और सुना।

ND
शहर के व्यस्ततम मार्ग पर एलजी एकेडमी स्कूल के 200 विद्यार्थियों द्वारा नुक्कड़ नाटक खेला गया। नाटक के माध्यम से मासूमों ने वह गंभीर बात कही जिसे हम अनदेखा, अनसुना करते हैं। धरती माँ का अपने बच्चों से सुरक्षा की पुकार करना और कार्बन डाय ऑक्साइड का इस प्रयास को अट्टहास में उड़ा देना वास्तविकता का प्रतिबिंब था।

ग्लोबल वार्मिंग पर नियंत्रण पाने हेतु कक्षा तीसरी से सातवीं तक के विद्यार्थियों ने 'क्राय फॉर हेल्प फ्रॉम मदर अर्थ' नुक्कड़ नाटक खेला। इस नाटक में बच्चों ने धरती और कार्बन डाय ऑक्साइड के द्वंद्व को दिखाते हुए बताया कि मानव का सचेत नहीं होना एक दिन धरती को कार्बन डाय ऑक्साईड मय कर निर्जीव बना देगा।

पृथ्वी बनी शिवांशी मिश्रा और कार्बन डाय ऑक्साइड बने अनमोल पाठक ने कुशल अभिनय किया। विद्यार्थियों ने न केवल नाटक प्रस्तुत किया वरन्‌ लोगों को ग्लोबल वार्मिंग के कारण व निवारण भी बताए। कृष्णपुरा छत्री पर हुए इस नाटक के बाद बच्चों ने आस-पास की दुकानों पर कागज की थैलियाँ बाँटते हुए पर्यावरण बचाने का संदेश भी दिया।

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