Festival Posters

Budget के गोपनीय पहलू

Webdunia
बुधवार, 27 जनवरी 2021 (17:37 IST)
आमतौर पर बजट निर्माण की प्रक्रिया सितम्बर-अक्टूबर के महीने से शुरू हो जाती है। दिसम्बर के अंत तक करीब-करीब सभी मंत्रालय अपने-अपने खर्च और नई योजनाओं का ब्योरा वित्त मंत्रालय को भेज देते हैं।
 
इसके बाद बजट निर्माण की प्रक्रिया में तेजी आती है। यह क्रम प्रतिवर्ष जारी रहता है। यानी यह कहा जा सकता है कि बजट का निर्माण एक सतत प्रक्रिया का हिस्सा है।
 
समूचे बजट में दो प्रस्ताव अत्यन्त महत्वपूर्ण होते हैं। पहला कर प्रस्ताव और दूसरा नई आर्थिक योजनाओं की घोषणा। इन दोनों प्रस्तावों का फैसला राजनीतिक स्तर पर होता है।
 
इसकी जानकारी सिर्फ वित्तमंत्री और प्रधानमंत्री को ही रहती है। नई योजनाओं की जानकारी संबद्ध मंत्रालयों को भी रहती है, लेकिन कर प्रस्तावों को तो अत्यन्त गोपनीय ही रखा जाता है।
 
केन्द्रीय मंत्रिमंडल के मंत्रियों को भी इसकी भनक बजट पेश होने के केवल एक घंटे पूर्व ही लग पाती है। जिस तारीख की सुबह बजट 11 बजे संसद में पेश होता है, तो उस पर केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मुहर 10 बजे लगती है, लेकिन आजकल गोपनीयता बरतने की परंपरा कुछ कमजोर हुई है।
 
कई बार बजट संसद में पेश होने से पहले ही लीक हो जाता है। कुछ लोग तो यह दावा करते हैं कि उदारीकरण के दौर में विश्वबैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के इशारे पर ही बजट बनाया जा रहा है। बजट को निम्न बिन्दुओं से समझा जा सकता है...
 
1. वित्तमंत्री का भाषण : यह दो भागों में होता है। पहले भाग में सामान्य आर्थिक परिदृश्य का विवरण होता है, जबकि दूसरे भाग में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर प्रस्तावों के अलावा आगामी वर्ष में आर्थिक मोर्चे पर सरकार द्वारा ली जाने वाली पहलकदमियों का ब्योरा रहता है।
 
2. वार्षिक वित्तीय कथऩ : यह बजट का मुख्य दस्तावेज है, जिसमें आगामी वित्तवर्ष के लिए अनुमानित सरकारी आय और व्यय पर विस्तृत टिप्पणी होती है।
 
3. बजट का सार : इस दस्तावेज में पूरे बजट का सार संक्षिप्त आंकड़ों और ग्राफों में दर्शाया रहता है। राज्यों व संघ राज्य क्षेत्रों से प्राप्त होने वाली और उनको दी जाने वाली रकम का ब्योरा भी इस दस्तावेज में रहता है।
 
4. वित्त विधेयक : सरकार द्वारा प्रस्तावित कर प्रस्तावों की विस्तृत सूची के अलावा इस दस्तावेज में वित्त विधेयक का व्याख्यात्मक प्रपत्र भी शामिल रहता है।
 
5. बजट प्राप्तियां : इस दस्तावेज में आगामी वर्ष के लिए सरकार को मिलने वाली अनुमानित सम्पूर्ण राजस्व और पूंजी प्राप्तियों का विस्तृत ब्योरा रहता है। सरकार को मिलने वाले अनुमानित घरेलू और विदेशी कर्जे का भी इसमें उल्लेख रहता है।
 
6. बजट व्यय : यह दस्तावेज सरकार द्वारा आगामी वर्ष में खर्च की जाने वाली राशि का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करता है। विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों को खर्चे के लिए कितनी राशि मिलेगी और कितनी राशि आयोजना व गैर आयोजना पर खर्च होगी, का भी इसमें विवरण रहता है।
 
7. अनुदान की मांग : इसमें विभिन्न मंत्रालयों की अपनी निजी मांगों के साथ-साथ अनुदानों की समस्त मांगों का सारांश होता है।
 
इसके अतिरिक्त एक पतली-सी पुस्तिका भी जारी की जाती है, जिसमें उपर्युक्त सभी दस्तावेजों की सूचना और व्याख्या होती है।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

India-US ट्रेड डील पर सियासी संग्राम, कांग्रेस का सवाल- 'आत्मनिर्भर भारत या अमेरिका-निर्भर भारत?'

मणिशंकर अय्यर ने बढ़ाई कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें, 'विस्फोटक' बयानों से पार्टी शर्मसार

Supreme Court कोई प्लेग्राउंड नहीं, असम CM हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ याचिका पर CJI की सख्त टिप्पणी

एमपी के आईएएस असफर ने की तीसरी शादी, दो पूर्व पत्‍नियां हैं कलेक्‍टर, तीसरी भी आईएएस, ये खबर मचा रही धमाल

रेप के आरोपों से घिरे महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी पर मध्यप्रदेश में कसेगा शिकंजा!, विदेश भगाने की भी अटकलें

सभी देखें

नवीनतम

Mohan Bhagwat : हिन्दू 3 बच्चे पैदा करें, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान, घर वापसी का काम तेज होना चाहिए

मध्यप्रदेश का आर्थ‍िक सर्वेक्षण 2025-26: सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 11.14 प्रतिशत वृद्धि

CM योगी की अखिलेश को सलाह, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए आगे आएं

प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को किया मजबूत तो बीमारू से बना उत्तम प्रदेश बना यूपी

बुधवार से शुरू होंगी यूपी बोर्ड परीक्षाएं, 53 लाख से अधिक परीक्षार्थी होंगे शामिल

अगला लेख