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आर्थिक समीक्षा : कौशल विकास और रोजगार बड़ी चुनौतियां

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नई दिल्ली। भारत में कुशल कार्यबल का अनुपात कम होने पर चिंता जाहिर करते हुए आज वित्त मंत्री अरूण जेटली द्वारा संसद में पेश आर्थिक समीक्षा 2014-15 में कहा गया है कि देश के सामने दो चुनौतियां हैं, कौशल विकास करना और रोजगार प्रदान करना।
 
समीक्षा में कहा गया कि देश के सामने दो तरह की चुनौतियां हैं, एक तो कौशल विकास करना और उसका बेहतर इस्मेताल करना।
 
समीक्षा में श्रम ब्यूरो रपट, 2014 के आधार पर गया गया है कि देश में कुशल कार्यबल का अनुपात तकरीबन दो प्रतिशत है जो शेष विकासशील देशों के मुकाबले काफी कम है। देश में 15 वर्ष या इससे अधिक आयु के सिर्फ 6.8 प्रतिशत लोग ही व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त हैं।
 
समीक्षा के मुतबिक राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के अध्ययन में कहा गया है कि 2013-14 में गैर कृषि क्षेत्रों में 12 करोड़ कार्यकुशल लोगों की जरूरत थी। समीक्षा में रोजगार की वर्ष दर वर्ष वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) में गिरावट पर चिंता जाहिर की गई है।
 
उल्लेखनीय है कि 2004-05 से 2011-12 के दौरान यह घटाकर 0.5 प्रतिशत रह गई जो 1999-2000 से 2004-2005 के बीच यह 2.8 प्रतिशत थी। जबकि इस अवधि में श्रम शक्ति का वर्ष दर वर्ष वृद्धि क्रमश 2.9 प्रतिशत और 0.4 प्रतिशत रही थी।
 
इसके अलावा कुल रोजगार में प्राथमिक क्षेत्र की भागीदारी घटकर आधी से भी कम होग जबकि द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों में रोजगार की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
 
समीक्षा में कहा गया कि कामगारों का एक अच्छा-खास हिस्सा अभी भी कम आय सृजन वाली गतिविधियों से ही जुड़ा है। (भाषा)
 

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