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क्या धरती से टकराएगा विशालकाय उल्कापिंड? जानें कब सच हो सकती है यह भविष्यवाणी

वेबदुनिया फीचर टीम
शुक्रवार, 26 जून 2026 (15:01 IST)
Asteroid 1997 NC1 : 750 से 1,650 मीटर चौड़ा एक एस्टेरॉयड 27 जून 2026 शनिवार को शाम 4:44 मिनट पर पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरने वाला है। बताया जा रहा है कि इस एस्टेरॉयड के पृथ्वी से टकराने की कोई संभावना नहीं है। इससे पृथ्वी को कोई खतरा नहीं होगा। इस पर भारत की ISRO, चीन की CNSA, अमेरिका की NASA समेत कई अंतरिक्ष एजेंसियों की नजर हैं। चलिए इसी संदर्भ में जानते हैं कि धरती पर एस्टेरॉयड का कितना खतरा है।
 

एस्टेरॉयड क्या हैं और इनकी संख्या?

परिभाषा: एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह या उल्कापिंड) किसी ग्रह या तारे के टूटे हुए हिस्से होते हैं। ये पत्थर या धातु के टुकड़े होते हैं, जिनका आकार एक छोटे कंकड़ से लेकर माउंट एवरेस्ट जैसी विशाल चट्टान तक हो सकता है।
 
टूटता तारा: जब ये पिंड अत्यंत तीव्र गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो घर्षण के कारण जलने लगते हैं। आम बोलचाल में इन्हें ही 'टूटता तारा' कहा जाता है। छोटे पिंड हवा में ही जलकर राख हो जाते हैं, जबकि बड़े पिंड धरती पर गिरते हैं।
 
अंतरिक्ष में मौजूदगी: खगोलविदों के अनुसार, हमारे सौरमंडल में ऐसे लाखों पिंड सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं। इनमें से करीब 20 लाख एस्टेरॉयड पृथ्वी के निकटवर्ती अंतरिक्ष में घूम रहे हैं। हर हफ्ते औसतन एक क्षुद्रग्रह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से होकर गुजरता है।
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अतीत का महाविनाश (इतिहास)

डायनासोर का अंत: पृथ्वी अतीत में भी कई बार इन आकाशीय पिंडों का प्रहार झेल चुकी है। हारवर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर के डॉ. अर्विंग शापिरो के अनुसार, लगभग साढ़े छह करोड़ साल पहले सैन फ्रांसिस्को की खाड़ी जितना बड़ा एक लघु ग्रह मेक्सिको में गिरा था। इस टक्कर से 10 करोड़ मेगाटन टीएनटी के बराबर विस्फोट हुआ, जिससे डायनासोर समेत कई प्रजातियां हमेशा के लिए लुप्त हो गईं और पृथ्वी पर वर्षों तक अंधेरा छाया रहा।
 
बृहस्पति ग्रह की घटना (1994): वर्ष 1994 में पृथ्वी के आकार के 10-12 उल्कापिंड बृहस्पति (Jupiter) ग्रह से टकराए थे। वह नजारा महाप्रलय जैसा था और उस टक्कर की आग और तबाही का असर आज तक वहां शांत नहीं हुआ है।
 
चेलियाबिंस्क हादसा (2013): नासा (NASA) के पूर्व प्रमुख जिम ब्रेडेस्टाइन के अनुसार, साल 2013 में रूस के चेलियाबिंस्क में एक एस्टेरॉयड टकराया था, जिससे 66 फुट गहरा गड्ढा हो गया था। इस घटना में भारी संपत्ति का नुकसान हुआ था और करीब 1500 लोग घायल हुए थे।
 
उराल हादसा (2013): रूस के उराल पर्वतीय क्षेत्र के ऊपर आसमान में शुक्रवार को एक विशाल उल्का के विस्फोट में करीब 1,000 लोग घायल हो गए। यह विस्फोट इतना भीषण था कि इसके वेग से खिड़कियां टूट गईं और इमारतें हिल उठीं तथा लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। रूसी विज्ञान अकादमी का कहना है कि इस उल्का का वजन करीब 10 टन था और इसने पृथ्वी के क्षेत्र में कम से कम 54 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से प्रवेश किया।
 

वर्तमान और भविष्य के बड़े खतरे

1. उल्कापिंड '2005 वाय-यू 55' (2005 YU55)

उज्जैन के खगोल विज्ञानी संजय केथवास के अनुसार, यह 'नियोज' (NEOs - Near Earth Objects) यानी पृथ्वी के पास मंडराने वाली वस्तुओं में सबसे विशाल है।
 
आकार और क्षमता: यह पहाड़ी आलू जैसी 1,300 फुट लंबी एक ठोस चट्टान है। यदि यह पृथ्वी से टकरा जाए, तो 50 अरब टन टीएनटी के बराबर विनाशकारी ऊर्जा पैदा होगी, जो आधी धरती को तबाह करने के लिए काफी है।
 
ट्रैक रिकॉर्ड: वर्ष 1981 में यह चंद्रमा के उस पार से निकला था। साल 2011 में यह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच से गुजरा, तब धरती बाल-बाल बची थी। वर्तमान में यह सूर्य के गुरुत्वाकर्षण में बंधा हुआ है और टेलीस्कोप के जरिए इस पर नजर रखी जा रही है।
 

2. एस्टेरॉयड 'एपोफिस' (Apophis)

2029 का संकट: अमेरिकी वैज्ञानिकों के अनुसार, 13 अप्रैल 2029 (शुक्रवार) को करीब 250 मीटर बड़ा यह क्षुद्रग्रह 37,014 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से पृथ्वी के बेहद करीब (मात्र 36 हजार किलोमीटर की दूरी) से गुजरेगा। यदि इसने थोड़ी भी दिशा बदली, तो यह धरती और हमारे सैटेलाइट्स से टकरा सकता है।
 
2036 का महासंकट: यदि 2029 में टक्कर नहीं भी हुई, तो लौटते समय वर्ष 2036 में इसका पृथ्वी से टकराना लगभग तय माना जा रहा है। इसकी विस्फोटक क्षमता हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 10 लाख गुना अधिक होगी।
 

3. अन्य हालिया एस्टेरॉयड (ARIS की रिपोर्ट)

नैनीताल के आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIS) के डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार, हाल ही में तीन और एस्टेरॉयड पृथ्वी के करीब से गुजरे हैं (जैसे- 2023 MT-1, ME-4 और यूक्यू 3)। इनमें से एक का आकार इंडिया गेट जितना बड़ा था, हालांकि इनसे धरती को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
 

भविष्यवाणियां और वैज्ञानिक सुरक्षा कवच

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी:

प्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस के अनुसार, तीसरे विश्व युद्ध के दौरान अंतरिक्ष से एक मील व्यास वाला गोलाकार पर्वत जैसा उल्कापिंड हिंद महासागर में गिरेगा। इससे आए महाविनाशकारी सैलाब के कारण मालदीव, भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत कई तटवर्ती देश जलमग्न हो जाएंगे और पृथ्वी अपनी धुरी से भी हिल सकती है।
 

विज्ञान की ढाल:

जहां नासा अब 140 मीटर या उससे बड़े 90% एस्टेरॉयड को ट्रैक करने में सक्षम है, वहीं वैज्ञानिकों का मानना है कि आज हमारे पास इतनी उन्नत तकनीक है कि किसी खतरनाक उल्कापिंड की दिशा को मिसाइल दागकर बदला जा सकता है। हालांकि, वैज्ञानिक यह भी चेतावनी देते हैं कि पृथ्वी के संपूर्ण विनाश के लिए सिर्फ उल्कापिंड, सूर्य की हलचल या सुपर वॉल्कैनो (महाज्वालामुखी) ही जिम्मेदार हो सकते हैं।

- अनिरुद्ध जोशी

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