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यौन संबंध का सडन कार्डिएक अरेस्ट से कोई नाता है?

Webdunia
बुधवार, 15 नवंबर 2017 (11:52 IST)
केटी सिल्वर (हेल्थ रिपोर्टर)
हाल में हुए एक शोध अध्ययन के मुताबिक सेक्स के दौरान सडन कार्डिएक अरेस्ट आने के मामले महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ज़्यादा होते हैं, लेकिन यही रिसर्च ये भी बताती है कि ऐसा कभी-कभार ही होता है। अमेरिका के सीडर-सायनाय हार्ट इंस्टीट्यूट के डॉक्टर सुमीत चुघ ने 4,557 मामलों की जांच की, जिसमें सामने आया कि सिर्फ़ 34 मामलों में कार्डिएक अरेस्ट सेक्स के दौरान या उसके एक घंटे के भीतर आया था। इन 34 मामलों में से 32 आदमियों के थे।
 
 
डॉक्टर चुघ ने बताया कि सेक्स और सडन कार्डिएक अरेस्ट की पड़ताल करने वाली यह अपनी तरह की पहली स्टडी है। इसके नतीजों को अमरीकन हार्ट एसोसिएशन की कॉन्फ़्रेंस में भी पेश किया गया।
 
कार्डिएक अरेस्ट का मतलब दिल का दौरा नहीं
सडन कार्डिएक अरेस्ट और दिल के दौरे में फ़र्क होता है। दिल का दौरा तब आता है जब दिल को पहुंचने वाले ख़ून में किसी वजह से रुकावट आ जाए। वहीं सडन कार्डिएक अरेस्ट में किसी गड़बड़ी की वजह से दिल अचानक काम करना बंद कर देता है। इस स्थिति में व्यक्ति बेहोश हो जाता है, सांस चलनी बंद हो जाती है और अगर तुरंत मदद न मिले तो जान भी जा सकती है।
 
 
कार्डिएक अरेस्ट से जुड़े तथ्य
अस्पताल से बाहर आने वाले कार्डिएक अरेस्ट के 90 फ़ीसदी मामलों में मरीज़ की जान नहीं बच पाती। सीपीआर न मिलने पर हर मिनट मरीज़ के बचने की संभावना 10 प्रतिशत कम होती जाती है। अगर पहले कुछ मिनटों में ही सीपीआर मिल जाए तो मरीज़ के बचने की संभावना दो से तीन गुना बढ़ जाती है।
 
सीपीआर के दौरान छाती पर एक मिनट में 100 से 120 बार दबाव डालना चाहिए। इसे समझने के लिए अमरीका के म्यूज़िक बैंड बीजीज़ के गाने स्टेइंग अलाइव को सुनने की सलाह दी जाती है, उसकी बीट्स को ज़रूरी रफ़्तार का सबसे सही उदाहरण माना जाता है।
 
स्रोत: अमेरिकी हार्ट एसोसिएशन
 
पहले से बीमार थे बहुत से लोग
डॉक्टर चुघ और उनके सहयोगियों ने पोर्टलैंड में 2002 से 2015 के बीच वयस्कों को आए सडन कार्डिएक अरेस्ट के मामलों की जांच की।
 
एक फ़ीसदी से भी कम मामलों में इसकी वजह सेक्स था। उसमें से भी ज़्यादातर मामले मध्यम उम्र के अफ़्रीकी-अमेरिकी आदमियों के थे जिन्हें पहले से कार्डियो वैस्क्यूलर परेशानी थी।
 
 
सीपीआर देना सबको आना चाहिए
स्टडी में ये भी पता लगा कि सिर्फ़ एक तिहाई मामलों में ही सीपीआर दी गई जबकि पीड़ित अकेले नहीं थे। डॉक्टर चुघ के मुताबिक़ इससे पता चलता है कि लोगों को सीपीआर सिखाना कितना ज़रूरी है। सीपीआर इमर्जेंसी में दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा है जिसमें छाती को तेज़ी से बार-बार दबाने और मरीज़ को सांस दिलाने की कोशिश की जाती है।
 
इसी कॉन्फ़्रेंस में पेश की गई एक और स्टडी के मुताबिक़ छह साल के बच्चे को भी सीपीआर देना सिखाया जा सकता है। ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन का कहना है कि दिल का दौरा या किसी सर्जरी के बाद मरीज़ को चार से छह हफ़्ते सेक्स नहीं करना चाहिए।

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