Hanuman Chalisa

वो देश जहां के लोग कम बोलना पसंद करते हैं

Webdunia
शुक्रवार, 22 जून 2018 (10:59 IST)
कम बोलना कुछ लोगों की आदत हो सकती है। लेकिन पूरा देश ही कम से कम बात करे, ये सुनने में थोड़ा अटपटा लगता है।
 
 
लातविया यूरोप का ऐसा देश है जिसे कम बोलने वालों का देश कहा जाता है। कम बोलना यहां की संस्कृति का हिस्सा है। हालांकि लातवियन ख़ुद इसकी निंदा करते हैं। लातवियन मिज़ाज से काफ़ी क्रिएटिव होते हैं। कुछ लोग कम बोलने और रचनात्मक सोच में रिश्ता तलाशते हैं। इसे लातविया की ख़ासियत मानते हैं।
 
 
हाल में लंदन बुक फेयर में एक लातवियन कॉमिक बुक चर्चा में रही। इसे लातवियन लिटरेचर संस्था ने तैयार किया था। दरअसल ये किताब इस संस्था की 'आई एम इंट्रोवर्ट मुहिम' का हिस्सा है। इस मुहिम को शुरू किया है लातविया की लेखिका अनेते कोनस्ते ने। इनके मुताबिक़ कम बोलना, लोगों से कम मिलना जुलना अच्छी आदत नहीं है।
 
 
जहां सारी दुनिया एक मंच पर आ गई है, हर विषय पर लोग खुलकर अपनी राय रख रहे हैं वहां ख़ामोश रहना नुक़सान दे सकता है। लोगों को अपनी आदत बदलने की ज़रूरत है।
 
 
एकांत पसंद होते हैं यहां के लोग
लातविया के लोग इतने ख़ुदपसंद और अपनी ही दुनिया में मगन रहने वाले क्यों हैं, इस पर एक रिसर्च की गई। पाया गया कि कम बोलने की आदत ज़्यादातर उन लोगों को है जो रचनात्मक कामों जैसे कला, संगीत या लिखने के काम से जुड़े हैं।
 
 
लातविया के एक मनोवैज्ञानिक के मुताबिक़ क्रिएटिविटी लातविया के लोगों की पहचान के लिए ज़रूरी है। इसीलिए यहां के लोग कम बोलना पसंद करते हैं। उनका ज़हन हर वक़्त नए ख़्याल सोचता रहता है। दरअसल लातविया की सरकार ने शिक्षा और आर्थिक उन्नति के लिए जितनी योजनाएं बनाई हैं उसके लिए रचनात्मक सोच को प्राथमिकता दी गई है।
 
 
यूरोपियन कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक़ यूरोपियन यूनियन मार्केट में रचनात्मक काम करने वाले सबसे ज़्यादा लातविया के लोग हैं।
 
 
लातविया के लोग ना सिर्फ़ कम बोलते हैं बल्कि एकांत पसंद होते हैं। एक दूसरे से मुख़ातिब होने पर किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट तक नहीं बिखरती। अजनबियों को देखकर तो बिल्कुल ही नहीं।
 
 
लातविया की राजधानी रीगा के गाइड फ़िलिप बिरज़ुलिस का कहना है कि यहां के लोग एक दूसरे का सामना करने से कतराते हैं। इसीलिए खुली सड़क की बजाए गलियों से रास्ता तय करना पसंद करते हैं। यहां तक कि ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन भी कम ही होता है जिसमें ज़्यादा से ज़्यादा लोग जमा हों।
 
 
जैसे लातवियन सॉन्ग एंड डांस फ़ेस्टिवल यहां का बड़ा आयोजन है। इस आयोजन में दस हज़ार से भी ज़्यादा गायक और डांसर्स हिस्सा लेते हैं। लेकिन कम लोगों के आने की वजह से ये फ़ेस्टिवल पांच साल में एक बार ही होता है। लेखिका कोनस्ते के मुताबिक़ अकेलेपन और एक दूसरे से दूर रहने की हद ये है कि, रस्मी सलाम दुआ से बचने के लिए लोग पहले पड़ोसी के घर से निकलने का इंतज़ार करते हैं।
 
 
लातविया की संस्कृति और पीढ़ियां
लातविया के लोग कम बोलने वाले और एकांत पसंद ज़रूर हैं। पर, इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि ज़रूरत पड़ने पर वो किसी की मदद नहीं करते। अगर आप कभी किसी मुश्किल में होंगे तो वो ख़ुद आगे बढ़कर आपकी मदद कर देंगे।
 
 
लातविया के लोग मानते हैं कि कम बोलना सिर्फ़ इनके कल्चर का ही हिस्सा नहीं है, बल्कि स्वीडन और फ़िनलैंड के लोग तो उनसे भी ज़्यादा एकांत पसंद हैं। यहां एक और बात पर ध्यान देने की ज़रूरत है। लातविया की आबादी में तमाम तरह के लोग रहते हैं। यहां बहुत से दूसरे देशों के लोग भी रहते हैं जिनकी भाषा और संस्कृति लातविया की संस्कृति का हिस्सा बन गई है।
 
 
लातविया में बड़ी संख्या में रूसी मूल के लोग भी रहते हैं। क्योंकि लंबे वक़्त तक ये सोवियत संघ का हिस्सा रहा था। इनमें से भी एक पीढ़ी ऐसी है जो सोवियत यूनियन के उस दौर की है जब लोगों पर हर तरह से नज़र रखी जाती थी। साथ ही उन पर एक जैसी जीवन शैली थोपी जाती थी।
 
 
वहीं दूसरी पीढ़ी ऐसी है जो पूंजीवाद के दौर में पली बढ़ी है। इस पीढ़ी का दुनिया देखने और समझने का नज़रिया पहली पीढ़ी से बिल्कुल अलग है। लिहाज़ा लातविया के लोगों की इस आदत के लिए किसी एक वजह को ज़िम्मेदार ठहराना ग़लत होगा।
 
 
दूर-दराज में अभी भी रहते हैं लोग
लातविया की भौगोलिक स्थिति भी इस तरह के मिज़ाज के लिए ज़िम्मेदार है। यहां घने जंगल हैं और आबादी कम है। लिहाज़ा एक दूसरे से दूरी बनाए रखने के लिए लोगों के पास भरपूर जगह है। लातविया के लोग प्रकृति प्रेमी हैं। वो अक्सर शहरों से दूर जंगलों में जाकर कुछ वक़्त गुज़ारते हैं। वो लकड़ी के मकानों में ज़रूरत भर के सामान के साथ गुज़ारा करते हैं।
 
 
हालांकि जंगलों में वक़्त बिताने की ये परंपरा बीसवीं शताब्दी में सोवियत सरकार के समय ही ख़त्म हो गई थी लेकिन आज भी कुछ हद तक ये परंपरा जारी है। आर्किटेक्चर ओज़ोला के मुताबिक़ 1948 से 1950 के बीच लातविया में दूर-दराज़ इलाक़ों में रहने का चलन 89.9 फ़ीसद से घटकर 3.5 फ़ीसद रह गया था।
 
 
एकांत पसंद होने के बावजूद दिलचस्प बात ये है कि लातविया की बड़ी आबादी मॉडर्न अपार्टमेंट में रहती है। आंकड़ों को जमा करने वाली वेबसाइट यूरोस्टेट के मुताबिक़ यूरोप की जितनी आबादी अपार्टमेंट में रहती है उसका बड़ा हिस्सा सिर्फ़ लातवियन लोगों का है।
 
 
वहीं रियल स्टेट कंपनी इकटोर्नेट के सर्वे के मुताबिक़ दो तिहाई से ज़्यादा आबादी अलग-थलग प्राइवेट घरों में रहना पसंद करते हैं।
 
 
कुछ लोगों का ये भी कहना है कि लातवियन लोगों को एकांत में रहने की आदत के लिए भारी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है। लातविया में बाहरी लोगों की संख्या काफ़ी बढ़ गई है और मूल लातवियनों की आबाद कम हो गई है। नतीजतन मूल लातवियनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
 
 
अगर कभी आपको लातविया जाने का मौक़ा मिले तो वहां कि ख़ामोशी से घबराने की ज़रूरत नहीं है। शुरूआत में थोड़ा अटपटा ज़रूर लगेगा लेकिन जब वहां के लोगों से दोस्ती हो जाएगी तो आप ख़ुद को अकेला महसूस नहीं करेंगे। लातविया के लोग जब किसी से रिश्ता जोड़ते हैं तो उसे दिल से निभाते हैं।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

Cold Blob क्या है, क्या एल नीनो के बीच नया खतरा, क्यों बदल सकता है भारत के मानसून का मिजाज

तुलसी का बड़ा धमाका, US की पूर्व इंटेलिजेंस चीफ गबार्ड ने सार्वजनिक किए गुप्त दस्तावेज, Corona पर खुलासे से पूरी दुनिया में हड़कंप

Operation CyHawk : 700 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़! 916 साइबर अपराधी गिरफ्तार, 21 राज्यों में दिल्ली पुलिस की मेगा रेड

Telegram vs WhatsApp : कौन-सा मैसेजिंग ऐप है बेहतर और दोनों में क्या है अंतर?

इंदौर में तीसरी मंजिल से गिरी NEET छात्रा, अस्पताल में मौत, हादसा या नीट पेपर लीक से है कनेक्‍शन?

सभी देखें

मोबाइल मेनिया

जून 2026 के 3 सस्ते स्मार्टफोन्स, 7000mAh बैटरी और गेमिंग परफॉर्मेंस का जबरदस्त कॉम्बो

Honor करने वाला है धमाका, आने वाला है 10,000mAh बैटरी और 10,000 Nits ब्राइटनेस वाला सस्ता स्मार्टफोन

15,000 रुपए में कौन सा फोन है बेस्ट? जानिए टॉप 5 5G स्मार्टफोन

Lava Bold N2 5G : यह भारत का सबसे सस्ता स्मार्टफोन, 6000mAh बैटरी, Android 16 और 120Hz डिस्प्ले

HMD Vibe 2 5G : AI फीचर्स और 6000mAh बैटरी से मचाएगा धमाल मचाएगा सस्ता स्मार्टफोन

अगला लेख