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सावधान! बुखार के बिना भी हो सकता है डेंगू

Webdunia
शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018 (12:50 IST)
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- गुरप्रीत सैनी
 
"कुछ देर काम के बाद ही मुझे थकान महसूस होने लगती है। मेरी उम्र 50 साल है। पिछले 12 साल से मुझे डायबटीज़ है और मैं बरसों से दवाई पर ही ज़िंदा हूं।" बस इतनी-सी शिकायत लेकर इस साल अगस्त के आखिर में एक अधेड़ उम्र का शख्स डॉक्टर आशुतोष विश्वास के पास आया।
 
 
दिल्ली के एम्स में मेडिसिन विभाग के डॉक्टर आशुतोष विश्वास को ये बड़ी ही नॉर्मल-सी बीमारी लगी। डॉक्टर आशुतोष ने मरीज़ का शुगर टेस्ट किया जो ख़तरे के निशान के पार था।
 
 
फिर क्या था, डॉक्टर विश्वास ने शुगर का इलाज किया और 24 घंटे के अंदर शुगर काबू में ले आए। शुगर काबू में लाने के बाद मरीज़ के खून के नमूने जांच के लिए भेजे गए। जांच रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि उनके प्लेटलेट्स काउंट बहुत कम है।
 
 
डॉक्टर विश्वास ने तुरंत उस मरीज़ का डेंगू टेस्ट कराया, जिसमें पता चला कि मरीज़ को डेंगू है। ये अपने आप डॉक्टर विश्वास और उनकी टीम के लिए बेहद चौंकाने वाला तथ्य था। मरीज़ को तो कभी बुखार आया ही नहीं था।
 
 
यानी ये बिना बुखार वाला डेंगू था, जिसका मरीज़ उनकी जानकारी में इससे पहले नहीं देखा गया था। हालांकि नौ दिन बाद उपचार के बाद मरीज़ ठीक हो गए थे।
 
 
जरनल ऑफ़ फिजिशियन ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित एक शोध पत्र के मुताबिक डॉक्टर विश्वास और उनकी टीम ने इस केस के बारे में पूरा एक शोध पत्र लिखा है। 'ए क्यूरियस केस ऑफ एफेब्रिल डेंगू' नाम से प्रकाशित इस शोध पत्र में डॉक्टर विश्वास ने विस्तार से इसके बारे में लिखा है।
 
 
'एफेब्रिल डेंगू' क्या है?
'एफेब्रिल डेंगू' यानी बिना बुखार वाला डेंगू। आम तौर पर होने वाले डेंगू में मरीज़ तेज़ बुखार की शिकायत करता है। उसके शरीर में भयानक दर्द होता है। लेकिन मधुमेह के मरीज़ों, बूढ़े लोगों और कमज़ोर इम्यूनिटी वाले लोगों में बुखार के बिना भी डेंगू हो सकता है।
 
 
ऐसे मरीज़ों को बुखार तो नहीं होता, लेकिन डेंगू के दूसरे लक्षण ज़रूर होते हैं। ये लक्षण भी काफी हल्के होते हैं। एम्स में डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन के डॉक्टर आशुतोष विश्वास कहते हैं, "इस तरह का डेंगू ख़तरनाक हो सकता है, क्योंकि मरीज को पता ही नहीं होता कि उसे डेंगू हो गया है। कई बार वो डॉक्टर के पास भी नहीं जाते।"
 
 
इस तरह के डेंगू में बहुत हल्का इंफेक्शन होता है। मरीज़ को बुखार नहीं आता, शरीर में ज़्यादा दर्द नहीं होता, चमड़ी पर ज़्यादा चकत्ते भी नहीं होते। कई बार मरीज़ को लगता है कि उसे नॉर्मल वायरल हुआ। "लेकिन टेस्ट कराने पर उनके शरीर में प्लेटलेट्स की कमी, व्हाइट और रेड ब्लड सेल्स की कमी होती है।"
 
 
जरनल ऑफ़ फिजिशियन ऑफ़ इंडिया की एक स्टडी के मुताबिक थाईलैंड में बच्चों में बिन बुखार वाले डेंगू के बहुत से मामले आए हैं। स्टडी के मुताबिक वहां के 20 फ़ीसदी बच्चों में इस तरह का डेंगू पाया गया है।
 
 
ऐसा डेंगू किन लोगों को हो सकता है
मैक्स अस्पताल के एसोसिएट डायरेक्टर - इंटरनल मेडिसिन रोमेल टीकु के मुताबिक -
 
•बुज़ुर्गों, छोटे बच्चों
 
•कमज़ोर इम्यूनिटी वाले लोगों
 
•मधुमेह के मरीज़
 
•कैंसर के मरीज़
 
•या जिनका ट्रांसप्लांट हुआ हो
 
 
इन लोगों को इस तरह का डेंगू होने का ख़तरा रहता है। इसलिए इस मौसम में कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है। डॉक्टरों के मुताबिक इस सीज़न में यानी अगस्त-सितंबर-अक्टूबर में अगर किसी को शरीर में दर्द, थकान, भूख ना लगना, हल्का-सा रैश, लो ब्लड प्रेशर जैसी समस्या हो, लेकिन बुखार की हिस्ट्री ना हो। तो वो डेंगू हो सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
 
 
उनके मुताबिक अगर मरीज़ सही समय पर प्लेटलेट्स चेक नहीं कराता, तो दिक्कत हो सकती है। अगर प्लेटलेट्स कम हो गए हैं तो ये ख़तरे की बात हो सकती है।
 
 
डॉक्टर टीकु कहते हैं कि आम तौर पर डेंगू में तेज़ बुखार, शरीर में भयंकर दर्द, सिरदर्द, उल्टी, शरीर पर चकत्ते हो जाते हैं। "लेकिन कुछ एक मामलों में ऐसे लक्षण नहीं होते। ऐसे असाधारण मामले हर साल आते हैं। ऐसे मरीज़ों को हम टेस्ट कराने की सलाह देते हैं और कई मामलों में टेस्ट पॉज़िटिव भी होता है।"
 
 
बुखार ना हो तब भी रहें सावधान
डॉक्टर टिकु कहते हैं कि कई बार जब डेंगू का मच्छर काटता है तो वो खून में बहुत कम वायरस छोड़ता है। इसलिए डेंगू के लक्षण भी बहुत हल्के होते हैं। "ज़्यादा वायरस छोड़ेगा तो ज़्यादा लक्षण देखने को मिलेंगे और कम वायरस छोड़ेगा तो कम लक्षण देखने को मिलेंगे या हो सकता है कि लक्षण नज़र ही ना आएं। इसके अलावा कई लोगों में बुखार की हिस्ट्री नहीं होती, इसलिए भी उन्हें बुखार नहीं होता।"
 
 
उनके मुताबिक इस साल डेंगू के मरीज़ो में ज़्यादा कॉम्प्लिकेशन देखने को नहीं मिल रही है। इस साल डेंगू काफी माइल्ड है। इसलिए लोगों को सतर्क रहने की ज़रूरत है।
 
 
खूब पानी पीएं
डॉक्टर कहते हैं कि पानी पीना डेंगू का कारगर इलाज है। आपको माइल्ड डेंगू हो या सीवर डेंगू, अगर आप खूब पानी पीएंगे तो जल्दी ही ठीक हो जाएंगे। पानी ना पीने या कम पीने की वजह से डेंगू बढ़ जाता है। इसलिए इस बात का खास ध्यान रखें। पानी पीते रहने और आराम करने से कई बार डेंगू खुद ही ठीक हो जाता है।
 
 
दिल्ली नगर निगम की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल 20 अक्टूबर तक डेंगू के एक हज़ार बीस मामले दर्ज किए गए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक बीते सालों के मुकाबले इस साल डेंगू के कम ही मामले सामने आए हैं। इसकी एक वजह इस साल डेंगू के वायरस का माइल्ड होना है।
 
 
आपको बता दें कि 2015 में डेंगू के 15 हज़ार 867 मामले देखने को मिले थे।
 

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