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E20 पेट्रोल से माइलेज घटेगा या नहीं, क्या सच में आएंगी चींटियां और बीमा पर पड़ेगा असर? हरदीप सिंह पुरी ने बताई सचाई

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भारत में ई20 (E20) फ्यूल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जहां एक तरफ लोगों की ये शिकायतें आ रही हैं और ई20 फ्यूल की वजह से बीते कुछ महीनों से उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो गया है। वहीं, दूसरी तरफ लोग यह भी शिकायत कर रहे हैं कि इंजन में खराबी और परफॉर्मेंस में गिरावट आई है, क्योंकि उन्हें लगता है कि पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग ज्यादा हो रही है। सरकार के इस फैसले पर खूब राजनीति भी हो रही है और विपक्षी पार्टियां आरोप भी लगा रही हैं। 
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भारत में ज्यादातर वाहन 2023 से पहले के हैं, जो E10 (10 फीसदी इथेनॉल) या शुद्ध पेट्रोल के लिए बने थे। ऐसे में लाखों कार मालिक सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि उनपर ई20 या इससे आगे E85 या E100 थोपने की कोशिश की जा रही है। इस पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीपसिंह पुरी ने सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) का जोरदार बचाव किया है। 

क्या कहा केंद्रीय मंत्री ने 

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन आशंकाओं को खारिज किया जिसमें E20 (20% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की सुरक्षा और माइलेज को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।  प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग 'भ्रामक और मनगढ़ंत नैरेटिव' फैला रहे हैं, जबकि एथेनॉल एक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त ईंधन घटक है, जो वाहनों की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रेसिंग कारों में भी एथेनॉल का उपयोग किया जाता है, जिससे एक्सेलेरेशन बेहतर होता है और इंजन नॉकिंग कम होती है।
 

क्या गिरेगा गाड़ी का माइलेज, चींटी और बीमा का क्या  

माइलेज को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल से माइलेज में मामूली 1 से 2 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है, लेकिन यह सामान्य तकनीकी कारणों से होती है। उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह स्थापित है कि एथेनॉल इंजन की परफॉर्मेंस को कई मामलों में सुधारता है।
 
 मंत्री ने वायरल अफवाहों का भी खंडन किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि E20 ईंधन से चींटियां आकर्षित होती हैं या बीमा पॉलिसी प्रभावित होती है। पेट्रोलियम मंत्रालय और बीपीसीएल जैसे सार्वजनिक उपक्रमों ने स्पष्ट किया कि फ्यूल-ग्रेड एथेनॉल में कोई अवशिष्ट शर्करा नहीं होती, जिससे कीट आकर्षित नहीं होते।  सरकार ने बताया कि भारत का E20 ईंधन की ओर संक्रमण अचानक नहीं बल्कि वर्षों के परीक्षण और नियामक जांच के बाद किया गया निर्णय है।
 

SIAM और ARAI की तकनीकी समीक्षा रही शामिल

इसमें SIAM और ARAI जैसी संस्थाओं की तकनीकी समीक्षा भी शामिल रही है। इसके अलावा सरकार देश में एथेनॉल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी तेजी से बढ़ा रही है। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और पुणे जैसे शहरों में 50 से 100 E100 (शुद्ध एथेनॉल) पंप शुरू किए जा रहे हैं, जिन्हें 2027 तक बढ़ाकर 5000 आउटलेट तक ले जाने की योजना है।  मंत्री ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने का मुद्दा भविष्य में उठ सकता है, लेकिन अभी किसी तरह की आधिकारिक घोषणा करना जल्दबाजी होगी।
 

गाड़ी के कौनसे पार्ट्‍स को हो रहा है नुकसान

सामने आई खबरों के मुताबिक इससे 2023 के बाद से बनी गाड़ियों में कोई परेशानी नहीं कर रही है, लेकिन पुरानी गाड़ी जैसे की क्लासिक कारों का सबसे नाजुक हिस्सा उनका फ्यूल सिस्टम होता है। पुरानी गाड़ियों में लगे रबर के होज़ पाइप, सील, ओ-रिंग्स और वाशर साधारण पेट्रोल के हिसाब से डिजाइन किए गए थे जबकि एथेनॉल एक साल्वेंट की तरह काम करता है जो इन रबर और प्लास्टिक के हिस्सों को धीरे-धीरे गला देता है। इसके पुरानी कारों के कार्बोरेटर में एथेनॉल की वजह से एक सफेद रंग का कचरा जमा होने लगता है। इससे फ्यूल की सप्लाई रुक जाती है और गाड़ी बीच रास्ते में झटका देकर बंद हो जाती है।

बीमा को लेकर भी आई थीं खबरें

बीते दिनों ऐसी खबरें भी आईं कि कुछ बीमा कंपनियों ने इथेनॉल मिश्रित ईंधन से खराब हुए इंजन को कवर करने से इनकार कर दिया है। हालांकि बाद में सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसा कुछ नहीं है। मंत्रालय ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है और इसके इस्तेमाल से मोटर इंश्योरेंस क्लेम पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।​

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

कांग्रेस का कहना है कि ई20 फ्यूल बिना उचित परीक्षण के करोड़ों नागरिकों पर थोपा गया प्रयोग है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और फिर सरकार का पक्ष आया कि यह पॉलिसी पूरी तरह से वैज्ञानिक रूप से जांची-परखी और नैशनल एनर्जी सिक्यॉरिटी के लिए काफी अहम है। सरकार के अनुसार इस फ्यूल पॉलिसी से भारत ने 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है और गन्ना किसानों को बड़ी आर्थिक मदद मिली है।

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