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मात्र इस एक मंत्र से प्रसन्न होंगी शीतला माता, अवश्य पढ़ें...

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शीतला माता को प्रसन्न करना है तो जपें यह एक मंत्र 
 
शास्त्रीय मान्यता के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी, वैशाख, जेष्ठ और आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी पूजन करने का प्रावधान है। चारों महीने के चार दिन का व्रत करने से शीतला जनित बीमारियों से छुटकारा मिलता है। इस पूजन में शीतल जल और बासी भोजन का भोग लगाने का विधान है। 
 
शीतला दिगंबर है, गर्दभ पर आरूढ है, शूप, मार्जनी और नीम पत्तों से अलंकृत है। अत: शीतला सप्तमी-अष्टमी पर शीतला माता का पाठ करके निरोग रहने के लिए निम्न मंत्र से प्रार्थना की जाती है। 
 
'वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बरराम्‌,
मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालंकृतमस्तकाम्‌।'
 
इसी दिन संताष्टमी का भी व्रत करने का विधान है। इसमें प्रातः काल स्नान आदि के बाद भगवान श्रीकृष्ण और माता देवकी का विधिवत पूजन करके मध्य-काल में सात्विक पदार्थों का भोग लगाना चाहिए।

ऐसा करने से पुण्य ही नहीं मिलता बल्कि समस्त दुखों का भी निवारण होता है।

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