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Nautapa 2023 : इस साल नौतपा कब शुरू होगा? क्या है नौतपा का विज्ञान और ज्योतिष?

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When will Nautapa 2023 start

 इस साल 2023 में कब से लग रहे हैं। इस साल 2023 में नौतपा को लेकर बहुत भ्रम की स्थिति बन रही है। जानकारों के अनुसार 25 मई नहीं बल्कि 26 मई से लगेंगे। नवतपा (Nautapa 2023 Date) की शुरूआत 25 मई की रात 4 बजे से हो रही है। यानि 26 मई की सुबह से इनका प्रारंभ हो रहा है। इसलिए इस बार नवतपा 25 मई नहीं बल्कि 26 मई से माने जाएंगे। हालांकि इनकी समाप्ति 2 जून को होगी। वर्ष 2023 में सूरज 25 मई की देर रात 4 बजे के बाद रोहिणी नक्षत्र (Nautapa 2023 Date) में प्रवेश करेगा तभी से नौतपा शुरू हो जाएंगे। जो 2 जून तक चलेंगे। इस दौरान सूर्य, मंगल, बुध का शनि से समसप्तक योग होने से भी धरती के तापमान में इजाफा होगा।
 
क्या होता है नौतपा-सूर्य 15 दिन के लिए रोहिणी नक्षत्र में गोचर करने लगता है। इन 15 दिनों के पहले के 9 दिन सर्वाधिक गर्मी वाले होते हैं। इन्हीं शुरुआती 9 दिनों को नौतपा कहते हैं। वर्ष 2023 में सूर्य रोहिणी में 12 दिन तक ही रहेगा।
 
नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर प्रभाव डालती है। इससे प्रचंड गर्मी होती है जो समुद्र के पानी का वाष्पीकरण तेजी करके बादलों का निर्माण करती है। इससे मानसून में अच्छी बारिश होने के आसार बनते हैं।
 
नौतपा के कारण गर्मी बढ़ने लगती है। इस दौरान तापमान बेहद उच्च होता है। उत्तर भारत में गर्म हवाएं यानी लू चलने लगती है। नौतपा में नौ दिनों तक गर्मी अपने चरम पर होती है।
 
प्रतिवर्ष ग्रीष्म ऋतु में नौतपा प्रारंभ होता है। इस बार नौतपा में सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही धरती का तापमान तेजी से बढ़ने लगेगा। 
 
नौतपा का संबंध ज्योतिष से जुड़ा है। ज्योतिष की गणना के अनुसार, जब सूर्य चंद्रमा के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है तो नौतपा प्रारंभ हो जाता है। सूर्य इस नक्षत्र में नौ दिनों तक रहता है।
 
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र के स्वामी हैं, जो शीतलता का कारक हैं, परंतु इस समय वे सूर्य के प्रभाव में आ जाते हैं।
 
कई ज्योतिषी मानते हैं कि यदि नौतपा के सभी दिन पूरे तपें, तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है।
 
मान्यता के अनुसार, नौतपा का ज्योतिष के साथ-साथ पौराणिक महत्व भी है। ज्योतिष के सूर्य सिद्धांत और श्रीमद् भागवत में नौतपा का वर्णन आता है। 
 
वैदिक ज्योतिष के अनुसार रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चंद्रमा और देवता ब्रह्मा हैं। 
 
सूर्य ताप, तेज का प्रतीक है, जबकि चंद्र शीतलता का। चंद्र से धरती को शीतलता प्राप्त होती है। सूर्य जब चंद्र के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है तो इससे वह उस नक्षत्र को अपने पूर्ण प्रभाव में ले लेता है।
 
जिस तरह कुंडली में सूर्य जिस ग्रह के साथ बैठ जाए वह ग्रह अस्त के समान हो जाता है, उसी तरह चंद्र के नक्षत्र में सूर्य के आ जाने से चंद्र के शीतल प्रभाव क्षीण हो जाते हैं यानी पृथ्वी को शीतलता प्राप्त नहीं हो पाती। इस कारण ताप अधिक बढ़ जाता है। 
 
नौतपा का जितना महत्व ज्योतिष शास्त्र में है, उतना ही वैज्ञानिक भी इसे मान्य करते हैं।
 
नौतपा के शुरुआती तीन दिनों में पहनावे और खान-पान का खास ख्याल रखना चाहिए। सूती वस्त्र धारण करना चाहिए ताकि त्वचा संबंधी रोगों से बचा जा सकें।
 
यह समय सूर्य का पापाक्रांत समय होता है। इस दौरान पेट से संबंधी बीमारियों के होने की आशंका अधिक होती है। हल्का भोजन लें और पानी ज्यादा से ज्यादा पीएं। मौसम के हिसाब से होने वाली व्याधियों से बचने की जरूरत है। खाने-पीने का भी विशेष ध्यान रखें।
 
नौतपा को केवल ज्योतिष में ही मान्यता प्राप्त नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक भी इस तथ्य से वाकिफ रखते हैं। वैज्ञानिक मतानुसार नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर आती है। इस कारण तापमान बढ़ता है। 
 
नौतपा के 9 दिनों में अधिक पानी पीने की सलाह दी जाती है, साथ ही शरीर का ठंडक देने वाली चीजों का सेवन करना चाहिए। 
 
अधिक गर्मी के कारण मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है जो समुद्र की लहरों को आकर्षित करता है। इस कारण ठंडी हवाएं मैदानों की ओर बढ़ती है। चूंकि समुद्र उच्च दबाव वाला क्षेत्र होता है इसलिए हवाओं का यह रूख अच्छी बारिश का संकेत देता है।

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