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सूर्य दक्षिणायन 2026: 21 जून से या कर्क संक्रांति से? जानिए कब शुरू होता है उत्तरायण पर्व

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Dakshinayan Surya
21 जून 2026 बड़ा दिन है इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे जबकि एकमत के अनुसार 16 जुलाई कर्क संक्रांति 2026 के दिन सूर्य उत्तरायण होंगे। चलिए जानते हैं इस गणित को। 21 जून को होगा सूर्य दक्षिणायन लेकिन ज्योतिष गणना के अनुसार 16 जुलाई को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की भूगोल (Science) और हिंदू ज्योतिष (Astrology) दोनों अपनी-अपनी जगह बिल्कुल सही हैं, लेकिन दोनों के मापने का तरीका अलग है। इसी वजह से दोनों में करीब 23-24 दिनों का अंतर आ जाता है। आइए इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।
 

1. 21 जून का दक्षिणायन (खगोलीय या वैज्ञानिक आधार)

वैज्ञानिक और भौगोलिक दृष्टि से 21 जून को सूर्य पृथ्वी की कर्क रेखा (Tropic of Cancer) के ठीक ऊपर होता है। यह उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) का सबसे लंबा दिन होता है। इसके बाद, पृथ्वी के झुकाव के कारण सूर्य की स्थिति दक्षिण की ओर (मकर रेखा की तरफ) खिसकने लगती है। चूंकि सूर्य की दिशा दक्षिण की तरफ मुड़ती है, इसलिए विज्ञान इसे 21 जून से ही 'दक्षिणायन' (Summer Solstice) मानता है। पश्चिमी ज्योतिष (Western Astrology) भी इसे 'ट्रॉपिकल कैंसर' (Tropical Cancer) की शुरुआत मानता है।  

 

2. हिंदू धर्म/ज्योतिष का दक्षिणायन (तारामंडल का आधार)

हिंदू वैदिक ज्योतिष 'सिडरेल ज़ोडिएक' (Sidereal Zodiac) यानी वास्तविक तारामंडल (Constellations) पर आधारित है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सूर्य जब वास्तव में आकाश में दिखने वाले कर्क तारामंडल (कर्क राशि) में प्रवेश करता है, तब 'कर्क संक्रांति' होती है और तभी से दक्षिणायन शुरू माना जाता है.यह तिथि वर्तमान में हर साल 16 या 17 जुलाई के आसपास आती है, न कि 21 जून को।
 

दोनों में अंतर क्यों है? 

इस अंतर का मुख्य कारण है पृथ्वी की एक खास गति, जिसे 'अयन चलन' (Precession of the Equinoxes) कहा जाता है।
पृथ्वी का डगमगाना (Wobbling): पृथ्वी अपनी धुरी पर बिल्कुल सीधी नहीं घूमती, वह एक लट्टू की तरह धीरे-धीरे डगमगाती (Wobble करती) है।
दूरी का बढ़ना: इस डगमगाहट के कारण हर 72 साल में सूर्य और तारों की स्थिति के बीच 1 डिग्री का अंतर आ जाता है।
 

हजारों सालों का अंतर:

आज से लगभग 1500-2000 साल पहले (वराहमिहिर और आर्यभट्ट के समय), 21 जून को ही सूर्य सचमुच कर्क राशि के तारों के सामने होता था। यानी तब विज्ञान और ज्योतिष दोनों एक ही दिन (21 जून को) दक्षिणायन मनाते थे।
 
आज की स्थिति: सदियों से हर साल 1 डिग्री का थोड़ा-थोड़ा अंतर जुड़ते-जुड़ते आज यह अंतर लगभग 24 डिग्री का हो चुका है। इसी अंतर को ज्योतिष में 'अयनांश' कहा जाता है।
 

सीधे शब्दों में कहें तो:

भौगोलिक दक्षिणायन (21 जून): यह पृथ्वी के मौसम और सूरज की किरणों के झुकाव पर आधारित है (सूर्य का उत्तरतम बिंदु पर पहुंचना)। धार्मिक दक्षिणायन (16-17 जुलाई): यह आकाश में मौजूद असली 'कर्क' नाम के तारों के समूह में सूर्य के प्रवेश पर आधारित है।
यही कारण है कि 21 जून को सूर्य भौतिक रूप से तो दक्षिण की ओर मुड़ जाता है (दक्षिणायन शुरू), लेकिन ब्रह्मांड के नक्षत्रों के हिसाब से उसे कर्क राशि के घर तक पहुंचने में 24 दिन और लग जाते हैं और वह 16-17 जुलाई को वहां पहुंचता है।
 

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