Publish Date: Fri, 25 Feb 2022 (18:20 IST)
Updated Date: Fri, 25 Feb 2022 (18:24 IST)
जब गोचर का शनि चंद्र राशि से चौथी तथा आठवीं राशि में आता है तब शनि की ढैय्या प्रारंभ होती है। शनि ग्रह एक राशि में ढाई वर्ष रहता है। साल 2021 में वह मकर राशि में पिछले साल से ही गोचर कर रहा है जिसके कारण 3 राशियों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है और 2 राशियों पर ढैय्या। जानिए क्या होता है ढैया का असर।
वर्तमान में शनि ग्रह के मकर राशि में रहने के कारण वर्ष 2021 में धनु, मकर और कुंभ इन तीन राशियों पर साल 2021 में शनि की साढ़ेसाती (Shani Sade Sati) चल रही है जबकि मिथुन और तुला पर ढैय्या (Dhaiya) चल रही है। 29 अप्रैल 2022 को इन्हें ढैय्या से मुक्ति मिलेगी। 17 जनवरी 2023 से शनि के मार्गी होने पर तुला और मिथुन राशि से पूरी तरह ढैय्या का प्रभाव खत्म हो जाएगा। तुला राशि पर शनि की ढैय्या 24 जनवरी 2020 से चल रही है।
- अप्रैल 2022 में मीन पर साढ़ेसाती प्रारंभ होगी जबकि कर्क और वृश्चिक पर शनि की ढैया प्रारंभ होगी।
- अप्रैल 2022 में धनु से साढ़ेसाती हटेगी और तुला एवं मिथुन वालों को शनि की ढैया से मुक्ति मिलेगी।
शनि का असर : कहते हैं कि शनि की साढ़ेसाती के पहले चरण में शनि जातक की आर्थिक स्थिति पर, दूसरे चरण में पारिवारिक जीवन और तीसरे चरण में सेहत पर सबसे ज्यादा असर डालता है। ढाई-ढाई साल के इन 3 चरणों में से दूसरा चरण सबसे भारी पड़ता है। माना जाता है कि जब शनि की ढैया आरंभ होती है तो व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। धन, सेहत और करियर पर इसका असर पड़ता है।
शनि की ढैय्या का असर : नींद कम हो जाती है। बार बार चोट लगती है। जातक वाद-विवाद में उलझकर और कोर्ट-कचहरी में फंस जाता है। संपत्ति को विवाद विवाद होता है। कार्यस्थल पर बाधाएं उत्पन्न होती हैं। कर्ज चढ़ जाता है और व्यक्ति को बुरी आदतों की लत लग जाती है। शारीरिक, मानसिक और कारोबार में हानि देती है शनि की ढैय्या।
शनि की ढैय्या से बचने के उपाय
*ग्यारह शनिवार को छाया दान करें।
*मेहतर को सिक्के दान करें।
*प्रतिदिन श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें।
*काली वस्तुओं, लोहा और तेल का मंदिर में दान करें।
*हमेशा साफ सुथरे और पवित्र बन रहें।
* तीर्थ यात्रा, समुद्र स्नान और धर्म सम्बन्धी दान करें।
सावधानी :
1. शराब पीने से बचकर रहें।
2. ब्याज का धंधा न करें।
3. पराई महिला पर बुरी नजर न रखें।
4. किसी असहाय, श्वान और अन्य प्राणी को न सताएं।
5. महिला और अपने से बड़ों का अपमान न करें।